ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (सांध्य) में ‘साध्य’ कार्यक्रम के अंतर्गत ‘मीमांसा व्याख्यानमाला’ का आयोजन किया गया। व्याख्यानमाला में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक विजय त्रिवेदी ने ‘राजनीति का सांस्कृतिक कर्म’ विषय पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में राजनीति और संस्कृति के संबंध, राजनीतिक प्रक्रियाओं में सांस्कृतिक तत्वों की भूमिका तथा भारतीय राजनीति के सांस्कृतिक पक्ष पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. भरत सिंह ने की। राजनीतिक विज्ञान विभाग के प्रभारी कुंवर प्रांजल सिंह ने सत्र का संचालन किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थी शामिल हुए।
राजनीति और संस्कृति के संबंध पर चर्चा
व्याख्यान के दौरान विजय त्रिवेदी ने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति और शासन व्यवस्था तक सीमित नहीं माना। उन्होंने राजनीति के व्यापक सांस्कृतिक पक्ष पर चर्चा की। उनके वक्तव्य में समाज की सामूहिक स्मृतियों, सांस्कृतिक प्रतीकों, परंपराओं और सामाजिक आकांक्षाओं के राजनीतिक प्रभाव को प्रमुखता दी गई।
उन्होंने राजनीति और संस्कृति के बीच संबंधों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। व्याख्यान में यह भी चर्चा हुई कि समाज की पहचान और सामूहिक सोच के निर्माण में सांस्कृतिक तत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समकालीन भारतीय राजनीति में सांस्कृतिक विमर्श
‘राजनीति का सांस्कृतिक कर्म’ विषय के तहत समकालीन भारतीय राजनीति को सांस्कृतिक संदर्भों के साथ समझने पर भी चर्चा हुई। व्याख्यान में राजनीतिक प्रक्रियाओं और सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तनों के बीच संबंधों को रेखांकित किया गया।
विजय त्रिवेदी ने राजनीति में संस्कृति की भूमिका को व्यापक सामाजिक संदर्भ में देखने की बात रखी। उन्होंने राजनीतिक विमर्श में परंपराओं, सांस्कृतिक प्रतीकों और सामूहिक स्मृतियों के महत्व पर विचार साझा किए।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने पूछे सवाल
व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने राजनीति और संस्कृति के संबंधों से जुड़े विभिन्न सवाल उठाए। शोधार्थियों ने भी विषय के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी जिज्ञासाएं सामने रखीं।
प्रश्नोत्तर के दौरान राजनीति, समाज और संस्कृति के अंतर्संबंधों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए। संवाद के इस सत्र में विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही।
विभिन्न विभागों के शिक्षकों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में राजनीतिक विज्ञान विभाग से प्रो. संजय कुमार, ओमप्रकाश दहिया, शुभ्रा पंत कोठारी और तारीख़ साहब उपस्थित रहे। अर्थशास्त्र विभाग से प्रो. जय किशन तथा पर्यावरण विज्ञान विभाग से अरबिन ठाकुर ने सहभागिता की।
वाणिज्य विभाग से बरिंदर कुमार कार्यक्रम में शामिल हुए। हिंदी विभाग से प्रो. अनिल शर्मा, सपना तिवारी और सतीश कुमार उपस्थित रहे। दर्शनशास्त्र विभाग से सूरज कुमार, मनोज कुमार और ज़फ़र ने कार्यक्रम में भाग लिया।
अंग्रेज़ी विभाग से हरि प्रसाद तथा भारतीय भाषाओं से जुड़े तिलक सरकार, सुशील कुमार, मुज़फ़्फ़र और विजय नारायण भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
बहुविषयक अकादमिक विमर्श बना कार्यक्रम
विभिन्न विभागों के शिक्षकों की भागीदारी के कारण ‘राजनीति का सांस्कृतिक कर्म’ विषय पर आयोजित यह व्याख्यानमाला बहुविषयक अकादमिक विमर्श का मंच बनी। कार्यक्रम में राजनीति विज्ञान के साथ हिंदी, दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, पर्यावरण विज्ञान, अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं से जुड़े शिक्षकों की उपस्थिति रही।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी से व्याख्यान के बाद चर्चा का दायरा भी विस्तृत हुआ। कार्यक्रम में राजनीति को सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों के साथ समझने से जुड़े विषयों पर संवाद हुआ।
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