दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। साहित्य अकादमी और महाविद्यालय ने संयुक्त रूप से इसका आयोजन किया। यह कार्यक्रम 13 और 14 अक्टूबर 2026 को महाविद्यालय परिसर में संपन्न हुआ।
संगोष्ठी का विषय ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: बौद्धिक विरासत, राष्ट्रीय दृष्टि और विकसित भारत की अनवरत यात्रा’ था। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से विद्वानों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मुखर्जी के विचारों, ऐतिहासिक योगदान और वर्तमान संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा हुई।
दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन
संगोष्ठी का उद्घाटन दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने किया। साहित्य अकादमी के उपसचिव श्री एन. सुरेश बाबू और इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक श्री के. जी. सुरेश भी उपस्थित रहे।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता बताई। साथ ही, उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व और बौद्धिक योगदान पर प्रकाश डाला।
अतिथियों ने राष्ट्रीय दृष्टि पर विचार रखे
महाविद्यालय की शासी निकाय की अध्यक्षा प्रो. सुदेशना मजूमदार ने विकसित भारत की संकल्पना पर विचार रखे। उन्होंने मातृभूमि के प्रति निष्ठा और सभ्यतागत मूल्यों के महत्त्व को रेखांकित किया।
इसके अलावा, श्री एन. सुरेश बाबू और श्री के. जी. सुरेश ने डॉ. मुखर्जी के ऐतिहासिक योगदान पर चर्चा की। उन्होंने उनके राष्ट्रवादी विचारों और शिक्षाविद् के रूप में उनकी भूमिका का उल्लेख किया।
मुख्य अतिथि श्री विजेन्द्र गुप्ता ने छात्राओं को इतिहास के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में महापुरुषों के योगदान को समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर हुआ अकादमिक सत्र
संगोष्ठी के पहले अकादमिक सत्र का विषय ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख की संभावनाएँ’ था। श्री आशुतोष भटनागर ने इस सत्र की अध्यक्षता की।
मुख्य वक्ता डॉ. प्रफुल्ल केतकर ने डॉ. मुखर्जी के बलिदान का स्मरण किया। वहीं, डॉ. बिनय कुमार सिंह ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन (SPMRF) और महाविद्यालय के स्टडी सर्किल के बीच सहयोग की घोषणा की।
भविष्य के शोध और प्रकाशन पर चर्चा
दूसरे अकादमिक सत्र का विषय ‘Future Research and Publication Aligning with the Vision of Dr. Shyama Prasad Mukherjee’ था। इसमें प्रो. मंजुला ग्रोवर ने अपने विचार रखे।
उन्होंने डॉ. मुखर्जी के विचारों में बौद्ध दर्शन के संदर्भ और उद्देश्यपूर्ण अनुसंधान के महत्त्व पर चर्चा की। इसके अलावा, अन्य प्लेनरी सत्रों में भी कई विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
इन सत्रों में इतिहास, राजनीति विज्ञान, दर्शनशास्त्र और प्रबंधन के विद्वानों ने भाग लिया। उन्होंने डॉ. मुखर्जी के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर अपने शोध प्रस्तुत किए।
समापन समारोह में पुस्तक का लोकार्पण
14 अक्टूबर को संगोष्ठी का समापन समारोह आयोजित हुआ। इसके मुख्य अतिथि डॉ. अनिर्बान गांगुली थे, जो श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। वहीं, पाञ्चजन्य के पूर्व संपादक श्री तरुण विजय विशिष्ट वक्ता के रूप में शामिल हुए।
इस अवसर पर डॉ. सुरेंद्र खान की पुस्तक ‘AI Powered Marketing’ का लोकार्पण किया गया। साथ ही, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया।
शोध प्रस्तुतियों के लिए प्रतिभागी सम्मानित
संगोष्ठी में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इसके बाद साहित्य अकादमी के सह-संपादक डॉ. सुशील द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का आयोजन साहित्य अकादमी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय के संयुक्त प्रयासों से हुआ। इसमें विभिन्न विषयों के विद्वानों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी के दौरान अकादमिक चर्चा, शोध प्रस्तुतियों और पुस्तक विमोचन सहित कई गतिविधियां आयोजित की गईं।
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