दिल्ली विश्वविद्यालय की संस्कृति परिषद ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय के सहयोग से दो दिवसीय अंतर-महाविद्यालयीय नाट्य प्रतियोगिता आयोजित की। यह कार्यक्रम 15 और 16 अक्टूबर को संपन्न हुआ। इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
प्रतियोगिता में माइम और मिमिक्री की प्रस्तुतियां हुईं। दोनों श्रेणियों में कुल 67 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें माइम के 25 और मिमिक्री के 42 प्रतिभागी शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी अभिनय क्षमता और रचनात्मकता दिखाने का अवसर देना था।
दिल्ली विश्वविद्यालय की नाट्य प्रतियोगिता में 67 प्रतिभागी
दिल्ली विश्वविद्यालय की संस्कृति परिषद ने इस प्रतियोगिता का आयोजन किया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय ने इसमें सहयोग किया। दो दिनों तक चली इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने माइम और मिमिक्री के जरिए अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की।
माइम में कलाकार बिना संवाद के हाव-भाव और शारीरिक गतिविधियों से अपनी बात प्रस्तुत करते हैं। वहीं, मिमिक्री में किसी व्यक्ति की आवाज, बोलने के अंदाज या व्यवहार की नकल की जाती है। इन दोनों विधाओं में अभिनय के साथ समयबद्ध प्रस्तुति और अभिव्यक्ति का विशेष महत्त्व होता है।
प्राचार्या ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सांस्कृतिक गतिविधियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
इसके अलावा, उन्होंने रचनात्मक अभिव्यक्ति के महत्त्व को भी रेखांकित किया। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर प्रदान करते हैं।
मिमिक्री प्रतियोगिता में निखिल भास्कर प्रथम
मिमिक्री प्रतियोगिता में तीन विद्यार्थियों ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। हिंदी विभाग के निखिल भास्कर ने पहला पुरस्कार जीता। जीसस एंड मैरी कॉलेज की अन्या सिंह दूसरे स्थान पर रहीं।
वहीं, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज की कशिश पांडेय ने तीसरा पुरस्कार हासिल किया। इन परिणामों के साथ मिमिक्री श्रेणी में विजेताओं की घोषणा की गई।
माइम प्रतियोगिता में इन संस्थानों ने हासिल किए स्थान
माइम प्रतियोगिता में भारती, हंसराज और भगिनी निवेदिता महाविद्यालय ने क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया।
इस श्रेणी में प्रतिभागियों ने संवाद के बिना अभिनय के माध्यम से अपनी प्रस्तुतियां दीं। माइम में चेहरे के भाव और शारीरिक गतिविधियां कहानी या विचार को व्यक्त करने का प्रमुख माध्यम होती हैं।
दोनों श्रेणियों के परिणामों ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को मान्यता दी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में व्यक्तिगत माइम विजेताओं के नाम नहीं दिए गए हैं।
दो दिनों में अलग-अलग पर्यवेक्षकों ने निभाई जिम्मेदारी
प्रतियोगिता के आयोजन के दौरान दोनों दिनों के लिए अलग-अलग पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए थे। पहले दिन डॉ. प्रेरणा मल्होत्रा ने पर्यवेक्षक की भूमिका निभाई। वहीं, दूसरे दिन श्री अभिषेक टंडन ने यह जिम्मेदारी संभाली।
इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगिता की गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। कार्यक्रम में माइम और मिमिक्री की प्रस्तुतियों के साथ विजेताओं के चयन की प्रक्रिया भी शामिल रही।
समापन समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारी रहे मौजूद
प्रतियोगिता का समापन समारोह 16 अक्टूबर को आयोजित हुआ। इसमें श्री अनूप लाठर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डॉ. राजेश सिंह और प्रो. रविंदर कुमार विशिष्ट अतिथियों के रूप में शामिल हुए।
समारोह के दौरान आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों के योगदान का उल्लेख किया गया। नोडल अधिकारी डॉ. मुनेश और संकाय समन्वयक सुश्री शिल्पा के प्रयासों की सराहना हुई।
सांस्कृतिक गतिविधियों को मिला मंच
दिल्ली विश्वविद्यालय की संस्कृति परिषद द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों को अपनी अभिनय प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिला। कार्यक्रम में माइम और मिमिक्री जैसी कला विधाओं को केंद्र में रखा गया।
इस आयोजन में 67 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान दोनों श्रेणियों के विजेताओं की घोषणा भी की गई। इसके साथ ही दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन हुआ।
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