नई दिल्ली के भारत मंडपम में BRICS Summit 2026 का आगाज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हाई-प्रोफाइल सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं। सम्मेलन में BRICS के 11 पूर्ण सदस्य देशों के साथ 10 पार्टनर देश भी हिस्सा ले रहे हैं। BRICS के विस्तार के साथ अब संगठन की संरचना पहले की तुलना में काफी बड़ी हो चुकी है।
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी। बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से इसका नाम BRIC से BRICS हुआ। पिछले कुछ वर्षों में संगठन में नए देशों के जुड़ने के साथ इसका दायरा लगातार बढ़ा है।
BRICS Summit 2026 में 11 पूर्ण सदस्य देश
BRICS में मौजूदा समय में 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं। मूल पांच देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।
2024 में जोहानिसबर्ग समिट के बाद BRICS का बड़ा विस्तार हुआ। इस विस्तार के तहत मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को संगठन में शामिल किया गया।
इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी BRICS का पूर्ण सदस्य बना। इसके साथ संगठन में पूर्ण सदस्यों की संख्या 11 हो गई।
BRICS के 11 पूर्ण सदस्य
- ब्राजील
- रूस
- भारत
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- ईरान
- सऊदी अरब
- UAE
- इंडोनेशिया
पूर्ण सदस्य बनने के बाद इन देशों को BRICS की गतिविधियों और निर्णय प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी मिलती है।
BRICS में पार्टनर कंट्री की व्यवस्था क्यों बनी?
BRICS के विस्तार के साथ बड़ी संख्या में देशों ने संगठन से जुड़ने में रुचि दिखाई। 2024 में रूस के कजान में आयोजित BRICS Summit के दौरान पार्टनर कंट्री की नई श्रेणी बनाई गई।
कजान समिट से पहले करीब 35 देशों ने BRICS से जुड़ने में रुचि दिखाई थी। इतने बड़े स्तर पर देशों को एक साथ पूर्ण सदस्य बनाना संगठन के लिए व्यावहारिक नहीं था। इसके बाद पार्टनर कंट्री की व्यवस्था तैयार की गई।
इस व्यवस्था के तहत संबंधित देशों को BRICS के साथ जुड़ने और उसकी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला, लेकिन उन्हें पूर्ण सदस्य देशों के समान अधिकार नहीं दिए गए।
10 देश हैं BRICS पार्टनर कंट्री
1 जनवरी 2025 से बेलारूस, बोलीविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान BRICS पार्टनर देश बने।
इसके बाद जून 2025 में वियतनाम भी पार्टनर कंट्री के रूप में BRICS से जुड़ गया। इस तरह पार्टनर देशों की संख्या 10 हो गई।
BRICS के 10 पार्टनर देश
- बेलारूस
- बोलीविया
- कजाखस्तान
- क्यूबा
- मलेशिया
- नाइजीरिया
- थाईलैंड
- युगांडा
- उज्बेकिस्तान
- वियतनाम
पार्टनर देशों की भूमिका पूर्ण सदस्यों की तुलना में सीमित है। हालांकि, उन्हें BRICS के साथ सहयोग बढ़ाने और चुनिंदा गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है।
पूर्ण सदस्य और पार्टनर कंट्री में क्या अंतर है?
BRICS के पूर्ण सदस्य संगठन की बैठकों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पूरी भागीदारी रखते हैं। वे संगठन के विभिन्न मंचों और प्रमुख बैठकों में शामिल होते हैं।
पूर्ण सदस्य देशों की BRICS की नीतियों और फैसलों में अहम भूमिका होती है। इसके अलावा न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) जैसी संस्थाओं से जुड़ी गतिविधियों में भी उनकी भागीदारी रहती है।
इसके मुकाबले पार्टनर देशों की भूमिका सीमित होती है। वे BRICS की कुछ महत्वपूर्ण बैठकों में भाग ले सकते हैं। हालांकि, उनकी भागीदारी बैठक और मुद्दे के अनुसार तय होती है।
पार्टनर देशों के अधिकार सीमित
पार्टनर कंट्री को पूर्ण सदस्य जैसा निर्णायक अधिकार नहीं मिलता। उन्हें BRICS की सभी बैठकों में पूर्ण सदस्य के समान भागीदारी का अधिकार नहीं है।
पार्टनर देशों की भागीदारी संबंधित बैठकों में परामर्श और सहमति की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। उन्हें पूर्ण सदस्यों की तरह संगठन के सभी फैसलों में निर्णायक भूमिका नहीं मिलती।
BRICS का बढ़ता दायरा
BRICS के विस्तार के साथ संगठन में पूर्ण सदस्य और पार्टनर देशों की अलग-अलग व्यवस्था सामने आई है। पूर्ण सदस्य देश संगठन की निर्णय प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं, जबकि पार्टनर देशों को सीमित भागीदारी और सहयोग का अवसर मिलता है।
नई दिल्ली में हो रहे BRICS Summit 2026 में 11 पूर्ण सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों की मौजूदगी संगठन के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दायरे को दर्शाती है।
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