डॉ. श्रीकांत जिचकरडॉ. श्रीकांत जिचकर

भारत में जब सबसे अधिक शिक्षित और बहुमुखी प्रतिभा वाले लोगों की चर्चा होती है, तो डॉ. श्रीकांत जिचकर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। महाराष्ट्र से आने वाले जिचकर ने चिकित्सा, कानून, प्रशासन, पत्रकारिता, समाजशास्त्र, इतिहास और राजनीति सहित कई क्षेत्रों में अध्ययन किया।

उनकी खासियत सिर्फ अधिक डिग्रियां हासिल करना नहीं थी। उन्होंने शिक्षा को अपने सार्वजनिक जीवन से भी जोड़ा। वे राजनेता, प्रशासक, लेखक और विचारक के रूप में भी सक्रिय रहे।

हालांकि, उन्हें आधिकारिक रूप से भारत का “सबसे पढ़ा-लिखा व्यक्ति” घोषित किया गया था, ऐसा कोई सर्वमान्य सरकारी रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए उन्हें भारत के सबसे अधिक शिक्षित और बहुमुखी प्रतिभा वाले व्यक्तियों में से एक कहना अधिक उचित है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर क्यों हो रही है चर्चा?

हर साल 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। यूनेस्को ने 17 नवंबर 1965 को इस दिवस की घोषणा की थी और 1966 से इसे मनाने की शुरुआत हुई।

इस दिवस का उद्देश्य दुनिया में साक्षरता के महत्व को बढ़ावा देना और शिक्षा को हर व्यक्ति तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर देना है।

2026 की थीम क्या है?

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2026 की थीम “Literacy for People, the Planet and Prosperity” है। इसका व्यापक संदेश यह है कि साक्षरता केवल पढ़ने और लिखने की क्षमता तक सीमित नहीं है। शिक्षा व्यक्ति, समाज और टिकाऊ विकास से भी जुड़ी हुई है।

इसी संदर्भ में डॉ. श्रीकांत जिचकर का जीवन शिक्षा के प्रति असाधारण समर्पण का उदाहरण माना जाता है।

डॉ. जिचकर के पास थीं कई शैक्षणिक डिग्रियां

डॉ. श्रीकांत जिचकर ने अलग-अलग विषयों में उच्च शिक्षा हासिल की। उनके अध्ययन का दायरा विज्ञान से लेकर कला और सामाजिक विज्ञान तक फैला हुआ था।

उन्होंने चिकित्सा विज्ञान और कानून की पढ़ाई की। इसके अलावा इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति, समाजशास्त्र, दर्शन, पत्रकारिता और प्रशासन जैसे विषयों में भी अध्ययन किया।

उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को लेकर विभिन्न स्रोतों में अलग-अलग आंकड़े मिलते हैं। लोकप्रिय रूप से उनके नाम के साथ 20 डिग्रियों, 28 गोल्ड मेडल और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का उल्लेख किया जाता है।

यही वजह है कि उनका नाम भारत के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों की सूची में लंबे समय से चर्चा में रहता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में भी हासिल की सफलता

डॉ. जिचकर की उपलब्धियां केवल विश्वविद्यालय की डिग्रियों तक सीमित नहीं थीं। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगी और पेशेवर परीक्षाओं में भी हिस्सा लिया।

उनकी शिक्षा और परीक्षाओं का सिलसिला बताता है कि वे नए विषयों को सीखने में लगातार रुचि रखते थे। चिकित्सा और कानून जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में अध्ययन करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने इसके साथ सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों को भी समझने का प्रयास किया।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि सीखने की प्रक्रिया किसी एक डिग्री या नौकरी के साथ समाप्त नहीं होती।

पढ़ाई के बाद राजनीति में बनाई पहचान

शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करने के बाद डॉ. श्रीकांत जिचकर ने सार्वजनिक जीवन का रास्ता चुना। वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य बने और बाद में राज्यसभा सांसद भी रहे।

राजनीति में रहते हुए उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और सामाजिक विकास जैसे विषयों पर काम किया। उनके लिए शिक्षा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि समाज और देश के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम थी।

उनकी बहुमुखी शिक्षा ने उन्हें अलग-अलग सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों को व्यापक नजरिए से समझने में मदद की।

भारत की साक्षरता दर में बड़ा बदलाव

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश की साक्षरता दर में पिछले दशकों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

1961 में भारत की साक्षरता दर करीब 28.30 प्रतिशत थी। 1971 में यह बढ़कर 34.45 प्रतिशत हुई। 2011 की जनगणना में साक्षरता दर 74 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

हाल के आंकड़ों में भारत की साक्षरता दर करीब 80 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है। इसके बावजूद देश में पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य अभी हासिल नहीं हुआ है।

शिक्षा सिर्फ डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं

डॉ. श्रीकांत जिचकर की कहानी शिक्षा के व्यापक अर्थ को सामने रखती है। किसी व्यक्ति की शिक्षा को केवल डिग्रियों की संख्या से नहीं मापा जा सकता। ज्ञान का इस्तेमाल समाज, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए किस तरह किया जाता है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

जिचकर ने अलग-अलग विषयों का अध्ययन किया और बाद में सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। यही कारण है कि उनका नाम आज भी विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच प्रेरणा के तौर पर लिया जाता है।

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