ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन पूरे मिडिल ईस्ट के लिए नई रणनीति तैयार कर रहा है। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप निजी बातचीत में युद्ध के बाद क्षेत्र के लिए कुछ बड़ा करने की योजना का संकेत दे चुके हैं।
इस प्रस्तावित रणनीति का मकसद केवल ईरान को रोकना नहीं है। अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को एक साझा सुरक्षा ढांचे में लाने, इजराइल के अरब देशों के साथ संबंध मजबूत करने और लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय विवादों को कम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
हालांकि, यह योजना अभी अंतिम रूप में तैयार नहीं हुई है। अमेरिकी अधिकारियों और सलाहकारों के बीच इस पर चर्चा जारी है।
ईरान के खिलाफ मजबूत क्षेत्रीय मोर्चे की तैयारी
ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित रणनीति का पहला बड़ा हिस्सा ईरान के प्रभाव को सीमित करना है। इसके लिए अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने सहयोगी देशों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश कर सकता है।
सहयोगी देशों की सुरक्षा पर अमेरिकी फोकस
योजना के तहत अमेरिका क्षेत्रीय सहयोगी देशों की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ एक ऐसा क्षेत्रीय मोर्चा तैयार करना है, जिसमें अमेरिका और उसके सहयोगी देश साझा सुरक्षा हितों पर काम करें।
इस रणनीति से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका भी मजबूत हो सकती है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सभी अमेरिकी सहयोगी इस प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या नहीं।
गाजा और इजराइल के पड़ोसी देशों पर भी नजर
प्रस्तावित अमेरिकी योजना का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा क्षेत्र के पुराने विवादों को कम करना है। इसके तहत 7 अक्टूबर 2023 के बाद से जारी संघर्ष और उससे पैदा हुए तनाव को कम करने की कोशिश की जा सकती है।
ट्रंप प्रशासन गाजा को लेकर अपनी प्रस्तावित योजना के अगले चरण को आगे बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। इसके साथ ही इजराइल और सीरिया के बीच सुरक्षा समझौते की दिशा में काम करने की संभावना है।
इजराइल-लेबनान समझौते को लागू कराने की कोशिश
अमेरिका इजराइल और लेबनान के बीच मौजूदा समझौते को प्रभावी तरीके से लागू कराने पर भी ध्यान दे सकता है। इसका उद्देश्य सीमावर्ती तनाव को कम करना और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा।
अब्राहम अकॉर्ड्स के विस्तार पर जोर
ट्रंप प्रशासन की रणनीति में इजराइल और अरब देशों के रिश्तों को सामान्य करने का मुद्दा भी अहम माना जा रहा है। अमेरिका अब्राहम अकॉर्ड्स के विस्तार की कोशिश कर सकता है।
इसका सबसे बड़ा लक्ष्य इजराइल और सऊदी अरब के बीच संबंधों को सामान्य करना हो सकता है। यदि दोनों देशों के बीच कोई बड़ा समझौता होता है, तो इसे ट्रंप प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जाएगा।
सऊदी अरब के साथ समझौता क्यों अहम?
सऊदी अरब मिडिल ईस्ट की राजनीति और अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। ऐसे में इजराइल और सऊदी अरब के बीच संबंध सामान्य होने से क्षेत्रीय राजनीति का समीकरण बदल सकता है।
अमेरिका इसे ईरान के प्रभाव को संतुलित करने और मिडिल ईस्ट में अपने सहयोगियों के बीच नए गठजोड़ को मजबूत करने के अवसर के तौर पर देख सकता है।
इजराइल और अमेरिका के चुनाव से चुनौती
ट्रंप प्रशासन की योजना के सामने घरेलू और क्षेत्रीय राजनीति भी बड़ी चुनौती है। इजराइल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने हैं, जबकि अमेरिका में नवंबर में मिडटर्म चुनाव होंगे।
अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि इजराइल में चुनाव के बाद बनने वाली सरकार उसकी प्रस्तावित रणनीति के साथ सहयोग करे। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ट्रंप प्रशासन इजराइल के चुनावी नतीजे का इंतजार करने के बजाय अपनी योजना पर आगे बढ़ सकता है।
अगर चुनाव के बाद इजराइल में राजनीतिक गतिरोध बना रहता है, तब भी ट्रंप प्रशासन क्षेत्रीय स्तर पर अपनी पहल जारी रख सकता है।
योजना पर अभी चल रहा है काम
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पिछले कुछ हफ्तों में अपने वरिष्ठ सलाहकारों के साथ कम से कम दो बैठकों में इस योजना पर चर्चा कर चुके हैं। इन बैठकों में क्षेत्रीय सुरक्षा, इजराइल-अरब संबंध और ईरान से जुड़ी रणनीति को लेकर अलग-अलग सुझाव सामने आए हैं।
हालांकि, योजना को अंतिम रूप देने में अभी कई सप्ताह लग सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि अलग-अलग हितों वाले मिडिल ईस्ट के देशों को एक साझा रणनीतिक ढांचे में कैसे लाया जाए।
प्रस्तावित योजना सफल होती है तो ईरान युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिका की भूमिका का नया स्वरूप देखने को मिल सकता है। लेकिन फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है और इसके अंतिम स्वरूप तथा क्षेत्रीय सहयोगियों की प्रतिक्रिया पर ही इसकी सफलता काफी हद तक निर्भर करेगी।
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