ट्रिपल-P फॉर्मूला को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुकी एलजेपी (रामविलास) अब यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भी सक्रिय होती दिखाई दे रही है। पार्टी के जमुई से सांसद अरुण भारती ने न्यूज़18 इंडिया के ‘डायमंड स्टेट्स समिट बिहार’ में संकेत दिए कि पार्टी उत्तर प्रदेश में एक नई सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के साथ उतरने की तैयारी कर रही है। इस रणनीति को पार्टी ने ‘ट्रिपल-P फॉर्मूला’ नाम दिया है।
सांसद अरुण भारती के अनुसार, पार्टी का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में सामाजिक समीकरणों को नए तरीके से साधना है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी या किसी गठबंधन का हिस्सा बनेगी।
ट्रिपल-P फॉर्मूला क्या है?
एलजेपी (रामविलास) ने अपने पारंपरिक नारे “धरती गूंजे आसमान, रामविलास पासवान” का विस्तार करते हुए नया नारा दिया है—
“पंडित-पासी-पासवान, धरती गूंजे आसमान।”
पार्टी का दावा है कि यह नारा केवल चुनावी संदेश नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और विभिन्न समुदायों को साथ लाने का प्रयास है।
अरुण भारती ने कहा कि चिराग पासवान का विजन केवल बिहार तक सीमित नहीं है। उनका कहना था कि पार्टी उत्तर प्रदेश के लोगों के मुद्दों पर भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है।
यूपी चुनाव 2027 में क्या होगी एलजेपी की रणनीति?
ब्राह्मण, पासी और पासवान समुदाय पर फोकस
ट्रिपल-P फॉर्मूला के तहत पार्टी ब्राह्मण (पंडित), पासी और पासवान समुदायों के बीच राजनीतिक तालमेल बनाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सामाजिक समीकरण चुनावी समर्थन में बदलता है, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव चुनावी मैदान में ही स्पष्ट होगा।
बीजेपी के साथ गठबंधन या अकेले चुनाव?
इस सवाल पर सांसद अरुण भारती ने कहा कि फिलहाल गठबंधन को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि चुनावी रणनीति और संभावित गठबंधन पर फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि एलजेपी (रामविलास) उत्तर प्रदेश में एनडीए के साथ चुनाव लड़ेगी या स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरेगी।
परिवारवाद के सवाल पर क्या बोले अरुण भारती?
कार्यक्रम के दौरान पार्टी में परिवारवाद और रिश्तेदारों को टिकट देने के आरोपों पर भी सवाल पूछा गया।
हालांकि, अरुण भारती ने इस विषय पर सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि चिराग पासवान ऐसा नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं, जिसे सभी वर्गों का समर्थन मिल रहा है और वे सभी समुदायों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं।
ट्रिपल-P फॉर्मूला का राजनीतिक असर कितना बड़ा हो सकता है?
क्या बदल सकते हैं वोटों के समीकरण?
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण, पासी और पासवान समुदाय कई क्षेत्रों में प्रभावशाली माने जाते हैं।
- ब्राह्मण मतदाता लंबे समय से भाजपा का महत्वपूर्ण आधार रहे हैं, हालांकि समय-समय पर नाराजगी की खबरें भी सामने आती रही हैं।
- पासी समुदाय प्रदेश के कई इलाकों में प्रभावशाली दलित वर्ग माना जाता है और उसका वोट विभिन्न दलों के बीच बंटा रहा है।
- पासवान समुदाय विशेष रूप से पूर्वांचल और बिहार से सटे क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव रखता है।
एलजेपी (रामविलास) इन तीनों समुदायों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, यह प्रयास कितना सफल होगा, इसका आकलन चुनावी नतीजों के बाद ही संभव होगा।
बिहार की राजनीति भी बनी हुई है प्राथमिकता
अरुण भारती ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में पार्टी के विस्तार की योजना के बावजूद बिहार पार्टी की प्राथमिक राजनीतिक प्राथमिकता बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि एलजेपी (रामविलास) का प्रमुख लक्ष्य बिहार में संगठन को और मजबूत करना है। साथ ही पार्टी चिराग पासवान को भविष्य में राज्य के शीर्ष नेतृत्व के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती सक्रियता
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार की कोशिश एलजेपी (रामविलास) की राष्ट्रीय राजनीति में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
यदि पार्टी उत्तर प्रदेश में प्रभावी प्रदर्शन करती है, तो भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर उसकी राजनीतिक भूमिका और गठबंधन की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं। हालांकि, चुनावी रणनीति और गठबंधन की तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
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