देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। तेज धूप, लू और बढ़ती उमस के बीच एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच भारत ने बिजली खपत के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है।
मंगलवार दोपहर 3 बजकर 40 मिनट पर भारतीय पावर ग्रिड पर रिकॉर्ड 260.45 गीगावाट (GW) बिजली की मांग दर्ज की गई। खास बात यह रही कि इतनी बड़ी मांग को बिना किसी बड़े व्यवधान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया। ऊर्जा मंत्रालय ने इसे भारतीय बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी उपलब्धि बताया है।
एक दिन में टूटा पुराना रिकॉर्ड
ऊर्जा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि मंगलवार को देश में बिजली की मांग 260.45 GW तक पहुंच गई। यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
इससे पहले सोमवार को देश में 257.37 गीगावाट बिजली की मांग दर्ज की गई थी। यानी सिर्फ एक दिन के भीतर नया रिकॉर्ड बन गया। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी और कूलिंग उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है।
राजधानी दिल्ली में भी इस सीजन की सबसे अधिक बिजली मांग दर्ज की गई। मंगलवार दोपहर 3:30 बजे दिल्ली की बिजली मांग 7,776 मेगावाट (MW) तक पहुंच गई।
पड़ोसी देशों से कई गुना आगे भारत
भारत के पावर ग्रिड की क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह दक्षिण एशिया के कई देशों की कुल बिजली मांग से कई गुना अधिक है।
आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान की अधिकतम बिजली मांग लगभग 28.3 GW है। वहीं बांग्लादेश की 16.5 GW, श्रीलंका की 3 GW, नेपाल की 2.2 GW, भूटान की 1.2 GW और अफगानिस्तान की 0.8 GW बिजली मांग है।
यदि इन सभी देशों की कुल बिजली मांग को जोड़ दिया जाए, तो यह लगभग 52 GW होती है। भारत अकेले 260.45 GW की मांग संभाल रहा है, जो इन देशों की कुल मांग से करीब पांच गुना अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि भारत के मजबूत ऊर्जा नेटवर्क और तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर को दर्शाती है।
कैसे संभव हुई निर्बाध बिजली सप्लाई?
इतनी बड़ी बिजली मांग को पूरा करना आसान नहीं था। इसके लिए सरकार और बिजली एजेंसियों ने एडवांस रिसोर्स प्लानिंग और रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन का सहारा लिया।
नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (NLDC), रीजनल लोड डिस्पैच सेंटर (RLDC) और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC) ने मिलकर बिजली उत्पादन और वितरण पर लगातार नजर रखी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान बिजली उत्पादन कंपनियों और ग्रिड ऑपरेटरों के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। इसी कारण इतनी अधिक मांग के बावजूद देश में बड़े स्तर पर बिजली कटौती नहीं हुई।
थर्मल पावर बनी सबसे बड़ी ताकत
देश की बिजली आपूर्ति बनाए रखने में कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। कुल बिजली आपूर्ति में लगभग 67 प्रतिशत योगदान थर्मल पावर का रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में जब बिजली की मांग अचानक बढ़ती है, तब थर्मल पावर ग्रिड की रीढ़ बनकर सामने आती है। लगातार बिजली उत्पादन बनाए रखने में कोयला आधारित संयंत्रों की भूमिका अहम रही।
हालांकि, सरकार लगातार रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।
सोलर और विंड एनर्जी ने भी दिया बड़ा योगदान
रिकॉर्ड बिजली मांग के दौरान सौर और पवन ऊर्जा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पीक आवर्स में अकेले सोलर पावर ने 56,204 मेगावाट से अधिक बिजली ग्रिड को उपलब्ध कराई।
यह कुल बिजली आपूर्ति का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा था। इसके अलावा पवन ऊर्जा परियोजनाओं ने भी कई राज्यों में अतिरिक्त बिजली सपोर्ट दिया।
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते उपयोग से ग्रिड को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली है।
बैटरी स्टोरेज सिस्टम ने बचाया ग्रिड
इस बार आधुनिक बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का उपयोग भी प्रभावी साबित हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार बैटरी स्टोरेज सिस्टम ने पीक डिमांड के समय अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराकर ग्रिड पर दबाव कम किया।
इसके साथ ही हाइड्रो पावर, न्यूक्लियर और गैस आधारित बिजली उत्पादन ने भी संतुलन बनाए रखने में मदद की। इन सभी स्रोतों के संयुक्त उपयोग ने देश को बड़े बिजली संकट से बचाया।
भीषण गर्मी से बढ़ी बिजली की मांग
मौसम विभाग के अनुसार देश के कई हिस्सों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के कई इलाकों में हीटवेव की स्थिति बनी हुई है।
गर्मी बढ़ने के साथ ही घरों, दफ्तरों और उद्योगों में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसी कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि तापमान और बढ़ता है तो बिजली की मांग में और वृद्धि हो सकती है।
भारत का ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर हुआ मजबूत
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती को दिखाती है। पिछले कुछ वर्षों में देश ने बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को तेजी से मजबूत किया है।
सरकार ने स्मार्ट ग्रिड, हाई कैपेसिटी ट्रांसमिशन लाइन और रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं पर बड़े स्तर पर निवेश किया है। इसका परिणाम अब रिकॉर्ड बिजली मांग को संभालने के रूप में दिखाई दे रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर भारत
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोयला, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज जैसी तकनीकों के संयुक्त उपयोग से देश भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो रहा है।
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार आने वाले वर्षों में ग्रीन एनर्जी क्षमता को और बढ़ाया जाएगा, ताकि बढ़ती मांग को पर्यावरण संतुलन के साथ पूरा किया जा सके।
अगले कुछ दिन रहेंगे चुनौतीपूर्ण
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भीषण गर्मी जारी रहने की संभावना जताई है। ऐसे में बिजली की मांग लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।
ऊर्जा एजेंसियां फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सरकार का दावा है कि देश के पास पर्याप्त बिजली उत्पादन क्षमता मौजूद है और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
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