नई दिल्ली: NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित इस मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया। इस फैसले ने करीब 23 लाख छात्रों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है।
हालांकि NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की है, लेकिन सवाल अब सिर्फ पुनः परीक्षा का नहीं है। सवाल यह है कि जब NTA ने पहले से सुरक्षा और पारदर्शिता के बड़े दावे किए थे, तो आखिर पेपर लीक कैसे हुआ? और क्या दोबारा परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित होगी? यही मुद्दे अब सरकार और एजेंसी दोनों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
देशभर के लाखों छात्र पिछले कई वर्षों से डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET-UG की तैयारी करते हैं। कई छात्र प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई करते हैं। परिवार अपनी आर्थिक बचत तक बच्चों की कोचिंग और पढ़ाई पर खर्च कर देते हैं।
ऐसे में परीक्षा देने के बाद जब छात्रों को यह जानकारी मिली कि पेपर लीक के आरोपों के चलते परीक्षा रद्द कर दी गई है, तो निराशा और मानसिक तनाव बढ़ गया। छात्रों का कहना है कि जिन्होंने ईमानदारी से मेहनत की, उनकी गलती क्या थी?
शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार पेपर लीक की घटनाएं छात्रों का भरोसा कमजोर कर रही हैं। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब तक की जांच में क्या सामने आया?
इस मामले की शुरुआती जांच राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) कर रही थी। अब जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे मामले की शुरुआत महाराष्ट्र के नासिक से हुई मानी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक प्रश्न पत्र प्रिंटिंग के लिए नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचा था। आरोप है कि वहीं इसकी पहली डिजिटल कॉपी तैयार की गई। जांच में एक निजी कूरियर कर्मचारी शुभम की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि सुरक्षित ट्रंक को करीब 30 मिनट तक एक्सेस करने की अनुमति मिली थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि मोबाइल फोन से फोटो लेने के बजाय हाई-डेफिनिशन पोर्टेबल स्कैनर की मदद से प्रश्न पत्र स्कैन किया गया।
टेलीग्राम ग्रुप के जरिए फैला पेपर
जांच में यह आशंका भी जताई गई है कि पेपर को टेलीग्राम के निजी ग्रुप्स के माध्यम से शेयर किया गया। राजस्थान SOG ने अब तक 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें मनीष यादव और राकेश मंडावरिया के नाम सबसे महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार मनीष यादव ने नासिक की प्रिंटिंग प्रेस में कथित डील की थी। इसके बाद पेपर चुरु के एक छात्र तक पहुंचा, जो केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहा था। वहां से पेपर सीकर में राकेश मंडावरिया तक पहुंचा और फिर कई छात्रों में बांट दिया गया।
जांच में दावा किया गया है कि यह पूरा नेटवर्क परीक्षा से लगभग 10 दिन पहले सक्रिय हो चुका था।
राजस्थान से हरियाणा और बिहार तक पहुंचा मामला
जांच एजेंसियों के अनुसार पेपर लीक का नेटवर्क राजस्थान तक सीमित नहीं था। पेपर हरियाणा और बिहार तक भी पहुंच चुका था। इसके लिए अलग-अलग टेलीग्राम ग्रुप बनाए गए थे और कथित रूप से बड़ी रकम का लेन-देन भी हुआ।
राजस्थान पुलिस ने मनी ट्रेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। इसके बाद NTA को मामले की जानकारी दी गई। फिर केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से चर्चा के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया।
इस बीच यह भी जानकारी सामने आई कि आरोपी राकेश मंडावरिया जांच से बचने के लिए देहरादून चला गया था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
NEET परीक्षा पहले भी रही विवादों में
NEET परीक्षा का इतिहास भी विवादों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2013 में पहली बार NEET यानी National Eligibility cum Entrance Test लागू किया गया था। इसका उद्देश्य पूरे देश में मेडिकल प्रवेश के लिए “एक देश, एक परीक्षा” प्रणाली लागू करना था।
शुरुआत में यह परीक्षा CBSE आयोजित करता था। वर्ष 2015 में भी NEET पेपर लीक का मामला सामने आया था, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी।
वर्ष 2018 में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) का गठन किया गया। NTA को NEET, JEE और UGC-NET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी दी गई। दावा किया गया था कि नई तकनीक और डिजिटल सुरक्षा के जरिए पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जाएगा।
हालांकि इसके बावजूद कई परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे। वर्ष 2024 में भी NEET परीक्षा को लेकर विवाद हुआ था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
NTA पर उठ रहे गंभीर सवाल
अब NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि एजेंसी के पास आधुनिक तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी, तो पेपर लीक कैसे हुआ?
NTA की संरचना में कुल 14 सदस्य हैं। इसकी अध्यक्षता प्रदीप जोशी कर रहे हैं, जिन्हें वर्ष 2023 में तीन वर्षों के लिए नियुक्त किया गया था। वे UPSC के सदस्य और कई राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष रह चुके हैं।
इसके बावजूद NEET जैसी बड़ी परीक्षा में सुरक्षा चूक सामने आने से एजेंसी की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
NTA DG ने क्या कहा?
NTA के महानिदेशक और 1995 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक सिंह ने इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा में “चूक” जरूर हुई, लेकिन पूरा प्रश्न पत्र लीक नहीं हुआ था।
उन्होंने बताया कि कुछ PDF फाइलों में मौजूद सवाल असली प्रश्न पत्र से मेल खाते थे। इसी कारण जांच एजेंसियों को मामला सौंपा गया।
DG अभिषेक सिंह ने कहा कि:
- परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी
- छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं करना होगा
- नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे
- परीक्षा केंद्रों में बदलाव नहीं होगा
- छात्रों से अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी
- पहले जमा की गई फीस वापस की जाएगी
उन्होंने यह भी कहा कि दोबारा परीक्षा पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ कराई जाएगी।
विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार को घेरा
पेपर लीक मामले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि NEET परीक्षा रद्द होना लाखों छात्रों के सपनों पर चोट है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में 89 पेपर लीक हुए और 48 बार परीक्षाएं दोबारा करानी पड़ीं। राहुल गांधी ने इसे “भ्रष्ट व्यवस्था की विफलता” बताया।
कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने भी विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
वहीं राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि सरकार परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
छात्रों का भरोसा लौटाना सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होगी। सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा वापस जीतना है।
हर वर्ष लाखों छात्र कठिन मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और करियर दोनों पर असर डाल रही हैं।
अब सभी की नजर CBI जांच और दोबारा होने वाली परीक्षा पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और NTA भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाते हैं।
यह भी जरूर पढ़े :
