दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार मिश्र ने अमेरिका के वॉशिंगटन डी.सी. में आयोजित 18वें IAB अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोधपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय प्रवासी परिवारों और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े सामाजिक पहलुओं पर अपने शोध के निष्कर्ष प्रस्तुत किए।
डॉ. मिश्र ने यह शोधपत्र विजिटिंग रिसर्च फेलो के रूप में अपने अकादमिक कार्य के तहत पेश किया। सम्मेलन का मुख्य विषय तकनीकी और सामाजिक परिवर्तन के दौर में मानव-केंद्रित, सतत तथा वैश्विक रूप से प्रासंगिक विकास रहा।
भारतीय प्रवासी परिवारों पर डॉ. मिश्र का शोध
डॉ. सुनील कुमार मिश्र के शोधपत्र का विषय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुजुर्गों की देखभाल था। इसमें वॉशिंगटन डी.सी. में रहने वाले प्रवासी बच्चों द्वारा दिल्ली में रह रहे अपने बुजुर्ग माता-पिता को दी जाने वाली सहायता का अध्ययन किया गया।
शोध में भावनात्मक सहयोग, आर्थिक मदद और देखभाल की व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया गया। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रवासन के कारण परिवारों में आने वाले बदलावों को समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझना है।
विदेश में रहने वाली संतानों की जिम्मेदारियां
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन के कारण कई परिवारों के सदस्य अलग-अलग देशों में रहते हैं। ऐसी स्थिति में बुजुर्ग माता-पिता और उनकी संतानों के बीच भौगोलिक दूरी बढ़ जाती है।
हालांकि, दूरी के बावजूद पारिवारिक जिम्मेदारियां बनी रहती हैं। विदेश में रहने वाली संतानों को आर्थिक सहायता, नियमित संपर्क और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए व्यवस्थाएं करनी पड़ सकती हैं।
इसी संदर्भ में डॉ. मिश्र का शोध प्रवासी परिवारों के बदलते संबंधों और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़ी चुनौतियों का अध्ययन करता है।
18वें IAB अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अकादमिक संवाद
वॉशिंगटन डी.सी. में आयोजित सम्मेलन में विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यहां वैश्विक सामाजिक परिवर्तन, भारतीय डायस्पोरा और अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
इसके अलावा, वृद्धावस्था अध्ययन और समकालीन समाजशास्त्रीय चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। डॉ. मिश्र ने इस अवसर पर अन्य शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के साथ अकादमिक संवाद किया।
तकनीकी और सामाजिक परिवर्तन पर चर्चा
सम्मेलन का मुख्य विषय मानव-केंद्रित और सतत विकास पर केंद्रित था। इसमें तकनीकी बदलावों के साथ सामाजिक जरूरतों को समझने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
बुजुर्गों की देखभाल इस चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू है। बदलती पारिवारिक संरचना और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन के कारण देखभाल के पारंपरिक तरीकों में बदलाव आ रहा है।
ऐसे में, समाजशास्त्रीय शोध परिवारों, समुदायों और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका को समझने में मदद कर सकता है।
विजिटिंग रिसर्च फेलो के रूप में शोधकार्य
डॉ. सुनील कुमार मिश्र वर्ष 2026 में IAB विजिटिंग रिसर्च फेलो के रूप में शोधकार्य कर रहे हैं। उनके शोध के प्रमुख क्षेत्र भारतीय प्रवासी समुदाय, अंतरपीढ़ी पारिवारिक संबंध और वृद्धावस्था का समाजशास्त्र हैं।
उनका अकादमिक कार्य भारत और विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवारों के संबंधों को समझने पर केंद्रित है। इसके साथ ही, वह प्रवासन के सामाजिक प्रभावों और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े मुद्दों का अध्ययन भी करते हैं।
भारतीय डायस्पोरा और वृद्धावस्था अध्ययन पर जोर
डॉ. मिश्र समाजशास्त्र के साथ गिरमिटिया अध्ययन, भारतीय डायस्पोरा अनुसंधान और वृद्धावस्था अध्ययन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में स्थापित गिरमिटिया अध्ययन एवं भारतीय डायस्पोरा अनुसंधान पीठ के समन्वयक भी हैं।
भारतीय डायस्पोरा का अध्ययन विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, वृद्धावस्था अध्ययन बुजुर्गों की जरूरतों, सामाजिक सुरक्षा और पारिवारिक सहयोग जैसे विषयों पर केंद्रित है।
इन दोनों क्षेत्रों को जोड़ने वाला शोध अंतरराष्ट्रीय प्रवासन और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संबंधों को समझने में मदद कर सकता है।
अकादमिक सहयोग के लिए जताया आभार
डॉ. मिश्र ने अकादमिक सहयोग के लिए प्रो. नरेंद्र रुस्तगी और लक्ष्मीबाई महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सीमा शर्मा कौशिक के प्रति आभार व्यक्त किया।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उनकी सहभागिता भारतीय प्रवासी परिवारों और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े समाजशास्त्रीय विषयों को अकादमिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर रही। सम्मेलन में हुए संवाद ने वैश्विक सामाजिक बदलावों और अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श का मंच प्रदान किया।
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