दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड (एनसीवेब) के लक्ष्मीबाई कॉलेज केंद्र में रविवार को “वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह-2026” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम कॉलेज परिसर के ललित कला प्रांगण में संपन्न हुआ। समारोह में छात्राओं की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेलकूद उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में 700 से अधिक छात्राएँ, प्राध्यापक और नॉन-टीचिंग स्टाफ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पर्यावरण शिक्षा विभाग के प्रो. जयंत कुमार त्रिपाठी थे। वहीं, भारतीय स्त्री शक्ति की संयुक्त सचिव डॉ. ज्योति चौथाईवाले विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। इसके अलावा एनसीवेब के उप-निदेशक डॉ. सुरेन्द्र कुमार, लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्राचार्य प्रो. लता शर्मा, सेंटर के टीचर-इन-चार्ज डॉ. मुकेश कुमार महतो, जॉइंट टीचर-इन-चार्ज डॉ. प्रियंका कुमारी और जेएनयू के डॉ. अश्विनी तिवारी सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद सभी अतिथियों का पारंपरिक हस्तकला, पौधा और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का वातावरण सांस्कृतिक उत्साह और शैक्षणिक गरिमा से भरा हुआ दिखाई दिया।
सेंटर के टीचर-इन-चार्ज डॉ. मुकेश कुमार महतो ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि एनसीवेब महिलाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. लता शर्मा ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की छात्राओं की मेहनत और समर्पण ही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र के सर्वांगीण विकास के लिए केवल शैक्षणिक उपलब्धि पर्याप्त नहीं होती, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं से जीवन में हमेशा प्रगतिशील सोच अपनाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि प्रो. जयंत कुमार त्रिपाठी ने अपने संबोधन में एनसीवेब की कार्यप्रणाली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने का यह मॉडल देश के अन्य विश्वविद्यालयों में भी लागू किया जाना चाहिए। उनके अनुसार इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था महिलाओं के लिए नए अवसरों का निर्माण करती है और समाज को अधिक सशक्त बनाती है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. ज्योति चौथाईवाले ने अपने वक्तव्य में महिला सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र और समाज की प्रगति महिलाओं की स्थिति पर निर्भर करती है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में स्त्री की भूमिका को आदर्श और मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि मातृशक्ति समाज निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है।
समारोह के दौरान शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा। छात्राओं और शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत गीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों को दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग के प्राध्यापक अजय कुमार कुमावत और अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापिका हुमेरा नाज़ ने किया। वहीं, केंद्र की उप-प्रभारी डॉ. प्रियंका कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
खेल दिवस में शिक्षकों और छात्राओं दोनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिला वर्ग की दौड़ प्रतियोगिता में डॉ. प्रियंका कुमारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। सुश्री उमा भारती दूसरे और सुश्री माधुरी झा तीसरे स्थान पर रहीं। पुरुष वर्ग में अजय कुमार कुमावत ने पहला स्थान हासिल किया। राहुल मिश्रा दूसरे और मनोज कुमार मंडल तीसरे स्थान पर रहे।
वार्षिक महोत्सव के अवसर पर बी.ए. (प्रोग्राम) तृतीय वर्ष की छात्रा जागृति को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और सक्रिय योगदान के लिए “एक्सीलेंस स्टूडेंट अवार्ड” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा।
गौरतलब है कि नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड (एनसीवेब) की स्थापना वर्ष 1944 में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण के उद्देश्य से की गई थी। वर्तमान में प्रो. गीता भट्ट बोर्ड की निदेशका हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के 27 कॉलेज केंद्रों पर एनसीवेब की कक्षाएँ संचालित की जाती हैं, जिनमें 26 स्नातक और एक परास्नातक केंद्र शामिल है। वर्षों से यह संस्थान सेमिनार, कार्यशालाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से महिला शिक्षा को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है।
यह भी जरूर पढ़े :
