राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के तत्वावधान में ‘युवा कुम्भ’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय था — “सेवा और समर्पण के 100 वर्ष एवं राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका”। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति देखने को मिली।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद महाविद्यालय की छात्रा ऐश्वर्या और छात्र प्रणव ने सरस्वती वंदना एवं शास्त्रीय गीत की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बना दिया।
प्राचार्य प्रो. योगेश्वर शर्मा ने युवाओं को दिया राष्ट्र सेवा का संदेश
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. योगेश्वर शर्मा ने मुख्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यदि युवाओं को सही दिशा, सकारात्मक विचार और राष्ट्रीय चेतना दी जाए, तो देश का भविष्य मजबूत बन सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों में केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर सामाजिक दायित्व, सेवा भाव और राष्ट्रभक्ति विकसित करने वाले कार्यक्रम भी नियमित रूप से होने चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे वैचारिक आयोजनों से छात्रों में नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
RSS के 100 वर्षों के सफर पर डॉ. रंजन वाधवा ने रखे विचार
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए जिला संघचालक डॉ. रंजन वाधवा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों के सेवा, समर्पण और संगठनात्मक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ का मूल मंत्र है — “भारत को जानो, भारत को मानो और भारत को बनाओ।”
उन्होंने बताया कि संघ ने पिछले एक शताब्दी में समाज के हर वर्ग तक पहुंचकर सेवा कार्यों के माध्यम से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। डॉ. वाधवा ने कहा कि संघ ने त्याग, अनुशासन और चरित्र निर्माण की ऐसी मिसाल पेश की है, जो विश्व स्तर पर अद्वितीय मानी जाती है।
मुख्य वक्ता निधि आहूजा ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का दिया आह्वान
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता निधि आहूजा ने अपने ओजस्वी संबोधन से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन यदि इस ऊर्जा को सही दिशा नहीं मिले तो यह सृजन की बजाय विनाश का कारण भी बन सकती है।
उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था के ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों द्वारा लागू की गई नीतियों ने भारत की पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को कमजोर किया। साथ ही उन्होंने मैकाले शिक्षा पद्धति के दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डाला।
निधि आहूजा ने महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फूले के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे समाज में जागरूकता और आत्मविश्वास पैदा होता है। उन्होंने युवाओं से स्वदेशी अपनाने, आत्मनिर्भर बनने और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने की अपील की।
‘भारत केवल सोने की चिड़िया नहीं, सोने का गरुड़ था’
अपने संबोधन के दौरान निधि आहूजा ने कहा कि भारत प्राचीन काल में केवल “सोने की चिड़िया” ही नहीं, बल्कि “सोने का गरुड़” था। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की असंगठित स्थिति के कारण देश को बार-बार विदेशी आक्रमणों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विशेषता बताते हुए कहा कि यह विश्व का सबसे बड़ा संगठन है, जो बिना किसी औपचारिक पंजीकरण के केवल व्यक्ति निर्माण, समर्पण और सेवा भावना के आधार पर करोड़ों लोगों को जोड़ने में सफल रहा है।
शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही बड़ी भागीदारी
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर कृष्ण कुमार ने कुशलतापूर्वक किया। वहीं, अंत में डॉ. संदीप ने उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. राम बाबू, डॉ. मूलचंद्र, डॉ. मोनिका पुरी सेठी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में युवाओं के बीच राष्ट्रभक्ति, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।
युवाओं के लिए प्रेरणा बना ‘युवा कुम्भ’
मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय में आयोजित यह युवा कुम्भ कार्यक्रम केवल एक वैचारिक मंच नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं को राष्ट्रहित में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन साबित हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाला भारत युवाओं के विचार, अनुशासन और समर्पण से ही निर्मित होगा।
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