यमुना सफाई अभियानयमुना सफाई अभियान

विश्व जल दिवस के अवसर पर IIT दिल्ली और हंसराज कॉलेज द्वारा यमुना नदी के सुर घाट पर एक व्यापक स्वच्छता-सह-वैज्ञानिक निगरानी अभियान चलाया गया। इस अभियान में 100 से अधिक छात्र स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदाय के लोगों ने भाग लिया।

यह पहल क्षेत्रीय समन्वय संस्थान (RCI), IIT दिल्ली द्वारा उन्नत भारत अभियान (UBA) हंसराज कॉलेज के सहयोग से आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को कम करना और लोगों को जागरूक करना था।

प्रदूषण के हॉटस्पॉट पर कार्रवाई

सुर घाट को इस अभियान के लिए विशेष रूप से चुना गया, क्योंकि यह क्षेत्र प्रदूषण का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां शहरी नालों से निकलने वाला अपशिष्ट जल और धार्मिक गतिविधियों से उत्पन्न कचरा बड़ी मात्रा में जमा होता है।

अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने नदी तट पर प्लास्टिक बोतलें, पॉलीथीन, कपड़े और फूलों के कचरे के ढेर को साफ किया। यह कचरा नदी की गाद में फंसा हुआ था, जिससे जल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।

विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

अभियान का नेतृत्व IIT दिल्ली के डॉ. विजय कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाना होगा।

उन्होंने “आत्मनिर्भर यमुना” की अवधारणा पर जोर देते हुए बताया कि कम लागत वाली जल-छनन तकनीक और सामुदायिक निगरानी प्रणाली को अपनाना आवश्यक है।

शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी

इस कार्यक्रम का समन्वयन हंसराज कॉलेज की प्रो. मोनिका कौल ने किया। उनके नेतृत्व में कॉलेज की पर्यावरण सोसायटी ‘हरितिमा’ और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के छात्रों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

प्रो. कौल ने कहा कि इस तरह के अभियान से छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिलता है और वे पर्यावरण संरक्षण में अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।

अभियान की प्रमुख गतिविधियां

अभियान के दौरान स्वयंसेवकों को दस्ताने और मास्क प्रदान किए गए। उन्होंने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए लगभग 50 बड़े बैग में अजैव-निम्नीकरणीय कचरा एकत्र किया।

इसके साथ ही, टीम ने यमुना के पानी की गुणवत्ता का परीक्षण भी किया। विभिन्न स्थानों और गहराइयों से जल के नमूने लेकर उनका विश्लेषण किया जाएगा।

जागरूकता और संकल्प

अभियान के तहत स्थानीय निवासियों के बीच जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया गया। उन्हें प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभाव और जल संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का समापन यमुना आरती और “यमुना बचाओ” के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने नदी को स्वच्छ रखने का वचन लिया।

भविष्य की योजना

अभियान के दौरान एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण IIT दिल्ली और हंसराज कॉलेज द्वारा किया जाएगा। इसके आधार पर यमुना नदी के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान तैयार किए जाएंगे।

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