वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ गई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बाद अब इराक ने भी तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उसके उत्पादन कोटा में बढ़ोतरी नहीं की गई तो वह संगठन से बाहर निकलने पर विचार कर सकता है। इराक की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब OPEC और उसके सहयोगी देशों के बीच उत्पादन लक्ष्य को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।
इराक OPEC का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। ऐसे में यदि वह संगठन से बाहर निकलता है तो इसका असर केवल OPEC तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक कच्चे तेल के बाजार और कीमतों पर भी पड़ सकता है।
इराक OPEC से नाराज क्यों है?
इराक का कहना है कि उसका मौजूदा उत्पादन कोटा उसकी वास्तविक उत्पादन क्षमता और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप नहीं है। तेल मंत्रालय के प्रवक्ता सलीम अल-रिकबी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में कहा कि OPEC को इराक की उत्पादन क्षमता को ध्यान में रखते हुए कोटा बढ़ाना चाहिए।
इराक लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि दशकों तक युद्ध, प्रतिबंध और राजनीतिक अस्थिरता झेलने के बाद उसकी अर्थव्यवस्था को पुनर्निर्माण के लिए अधिक राजस्व की आवश्यकता है। इसके लिए तेल उत्पादन बढ़ाना जरूरी है।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर
वर्तमान में इराक प्रतिदिन लगभग 40 लाख बैरल तेल का उत्पादन करता है। हालांकि बगदाद सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 70 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाना है।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा OPEC कोटा इस लक्ष्य को हासिल करने में बाधा बन रहा है। यही वजह है कि इराक संगठन के भीतर अधिक उत्पादन की अनुमति चाहता है।
UAE के बाद इराक की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
इस वर्ष UAE भी उत्पादन कोटा को लेकर असहमति जताते हुए OPEC से अलग हो चुका है। अब इराक की ओर से सामने आई चेतावनी ने संगठन के भीतर बढ़ते मतभेदों को उजागर कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इराक की यह रणनीति OPEC के साथ चल रही बातचीत में दबाव बनाने का प्रयास भी हो सकती है। हालांकि इराकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल संगठन छोड़ने का कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है।
OPEC के लिए क्यों अहम है इराक?
इराक केवल एक सदस्य देश नहीं, बल्कि OPEC के पांच संस्थापक सदस्यों में शामिल है। वर्ष 1960 में बगदाद में ही इस संगठन की स्थापना हुई थी।
इसके अलावा इराक OPEC का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। ऐसे में उसका बाहर निकलना संगठन की विश्वसनीयता और बाजार पर प्रभाव दोनों को कमजोर कर सकता है।
अगर इराक OPEC छोड़ता है तो क्या होगा?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इराक OPEC से बाहर निकलकर स्वतंत्र रूप से उत्पादन बढ़ाता है तो वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति तेजी से बढ़ सकती है।
बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि इराक उत्पादन बढ़ाकर 70 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 50 से 55 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं। यह मौजूदा स्तर से लगभग 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट होगी।
तेल कीमतों पर क्या पड़ेगा असर?
कच्चे तेल की कीमतें मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती हैं। OPEC का सबसे बड़ा प्रभाव इसी वजह से है क्योंकि वह सदस्य देशों के उत्पादन को नियंत्रित करता है।
यदि इराक स्वतंत्र रूप से उत्पादन बढ़ाता है तो:
- वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ सकती है।
- OPEC की बाजार नियंत्रित करने की क्षमता घट सकती है।
- कीमतों पर दबाव बन सकता है।
- भविष्य में प्राइस वॉर की आशंका बढ़ सकती है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए क्या संकेत?
हाल के वर्षों में OPEC का प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। अमेरिका का शेल ऑयल उत्पादन, गैर-OPEC देशों की बढ़ती हिस्सेदारी और सदस्य देशों के बीच मतभेद इसके प्रमुख कारण रहे हैं।
इराक का संभावित अलगाव इस प्रवृत्ति को और तेज कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि OPEC के भीतर एकजुटता कमजोर होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
OPEC और इराक के बीच बातचीत जारी
फिलहाल इराक ने संगठन छोड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। बगदाद का कहना है कि वह OPEC के भीतर रहकर अपने उत्पादन कोटा में वृद्धि चाहता है। हालांकि यदि उसकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, तो भविष्य में संगठन से बाहर निकलने का विकल्प खुला रहेगा।
ऊर्जा बाजार की नजर अब OPEC की आगामी बैठकों और इराक को दिए जाने वाले संभावित उत्पादन कोटा पर टिकी हुई है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा वैश्विक तेल बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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