सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ‘नताशा डॉल’ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई है। चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से शुरू हुआ यह ट्रेंड अब कई देशों में चर्चा का विषय बन गया है। आलोचकों का कहना है कि इस ट्रेंड ने नस्लवाद, ऑनलाइन मनोरंजन की सीमाओं और बच्चों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विवाद का केंद्र एक सांवले रंग की बच्चे जैसी दिखने वाली डॉल है, जिसके साथ बनाए जा रहे कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इन वीडियो में खिलौने को खींचते, दबाते, फेंकते और नुकसान पहुंचाते हुए दिखाया गया है।
क्या है नताशा डॉल?
नताशा डॉल एक प्रकार का स्क्वीज टॉय (Squeeze Toy) है। यह आमतौर पर स्लो-राइजिंग मेमोरी फोम या सॉफ्ट थर्मोप्लास्टिक रबर से बनाया जाता है।
यह खिलौना बच्चे के आकार जैसा दिखाई देता है और इसे दबाने या तनाव कम करने वाले खिलौने के रूप में बाजार में बेचा जाता है। हाल के दिनों में जिस संस्करण ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया है, उसमें डॉल का रंग सांवला या गहरा दिखाया गया है।
यह ट्रेंड सबसे पहले चीन के लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म डौयिन (Douyin) और रेडनोट (RedNote) पर सामने आया। इसके बाद यह अन्य देशों तक पहुंच गया।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक कंटेंट क्रिएटर के वीडियो से हुई। बताया जाता है कि एक व्लॉगर ने मजाकिया अंदाज में इस खिलौने को अपनी बेटी की तरह पेश किया और उसका नाम ‘नताशा’ रखा।
बाद में खिलौना गिरने से उसका आकार बदल गया और उससे जुड़ी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद बड़ी संख्या में अन्य कंटेंट क्रिएटर्स ने भी इसी तरह के वीडियो बनाना शुरू कर दिए।
कुछ वीडियो में डॉल को खींचते, दबाते और फेंकते हुए दिखाया गया। वहीं कुछ मामलों में खिलौने को सुई चुभाने और चाकू से काटने जैसी गतिविधियां भी दिखाई गईं।
नस्लवाद को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
नताशा डॉल विवाद केवल खिलौने तक सीमित नहीं है। आलोचकों का कहना है कि डॉल का रंग-रूप और उससे जुड़े कुछ वीडियो नस्लीय रूढ़ियों को बढ़ावा देते हैं।
हांगकांग में रहने वाले अश्वेत समुदाय के कई सदस्यों ने इन वीडियो की आलोचना की है। उनका कहना है कि मनोरंजन के नाम पर किसी विशेष नस्ल से मिलते-जुलते रूप वाले खिलौने के साथ हिंसक व्यवहार दिखाना संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को प्रभावित कर सकता है।
हांगकांग फ्री प्रेस की एक रिपोर्ट में भी इस ट्रेंड को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि कई लोगों ने इन वीडियो को अपमानजनक और असंवेदनशील बताया है।
बच्चों पर प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों की चिंता
मनोविज्ञान और बाल विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बच्चे लगातार ऐसे वीडियो देखते हैं जिनमें किसी विशेष रूप-रंग वाले खिलौने के साथ हिंसक व्यवहार दिखाया जाता है, तो इसका उनके सोचने और समझने के तरीके पर प्रभाव पड़ सकता है।
कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि ऑनलाइन कंटेंट तैयार करते समय सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ी निगरानी
विवाद बढ़ने के बाद कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने संबंधित वीडियो की समीक्षा शुरू कर दी है। कुछ वीडियो और अकाउंट्स से सामग्री हटाए जाने की भी खबरें सामने आई हैं।
हालांकि कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर यह खिलौना अभी भी बिक्री के लिए उपलब्ध बताया जा रहा है।
अधिकारियों ने लिया संज्ञान
मामले को लेकर चीन के कंज्यूमर एसोसिएशन और स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर मार्केट रेगुलेशन ने भी संज्ञान लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने कहा है कि कुछ वीडियो में दिखाई गई सामग्री नाबालिगों के लिए अनुपयुक्त हो सकती है। साथ ही ऐसी सामग्री की निगरानी और समीक्षा की जा रही है, जिसमें हिंसक या आपत्तिजनक तत्व शामिल हों।
वैश्विक स्तर पर जारी है बहस
नताशा डॉल से जुड़ा विवाद सोशल मीडिया की भूमिका, कंटेंट मॉडरेशन और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार को लेकर नई चर्चा का विषय बन गया है।
वायरल वीडियो के बीच विभिन्न सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और समुदायों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वहीं कई प्लेटफॉर्म्स पर इस विषय को लेकर बहस जारी है।
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