महिला सशक्तिकरण, डिजिटल जागरूकता और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देशव्यापी “नारी सेतु भारत पहल” का औपचारिक शुभारंभ शुक्रवार को नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047” विजन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य जागरूकता और स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यदि भारत को 2047 तक विकसित और समावेशी राष्ट्र बनाना है तो महिला नेतृत्व आधारित विकास और युवाओं की सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता देनी होगी।
महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित है “नारी सेतु भारत पहल”
कार्यक्रम के दौरान “नारी सेतु भारत पहल” के प्रमुख उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। पहल के अंतर्गत बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सुकन्या समृद्धि योजना के प्रति जागरूकता फैलाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता, डिजिटल साक्षरता और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए कई योजनाओं को समाज तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
आयोजकों के अनुसार यह अभियान महिलाओं और बालिकाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का एक बड़ा माध्यम बनेगा। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
हंसराज कॉलेज के शिक्षकों ने निभाई अहम भूमिका
“नारी सेतु भारत पहल” के संयोजक और दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. ज्ञानेश्वरी मलिक और डॉ. प्रभांशु ओझा ने कार्यक्रम में इस अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज और समुदायों के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय यदि ग्रामीण समुदायों से सीधे जुड़ते हैं तो सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है। इस पहल को हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉ. रमा का भी महत्वपूर्ण सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
एक वर्ष में खुले 110 सुकन्या समृद्धि खाते
कार्यक्रम में बताया गया कि इस पहल के तहत पिछले एक वर्ष में दिल्ली-एनसीआर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पांच बड़े जनजागरूकता अभियान चलाए गए। इन अभियानों के माध्यम से कुल 110 सुकन्या समृद्धि योजना खाते खोले गए।
अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को बालिका शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना था। आयोजकों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने से सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
25 केंद्रीय विश्वविद्यालयों तक पहुंचेगा अभियान
“नारी सेतु भारत पहल” को अब राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना बनाई गई है। कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि यह अभियान देशभर के 25 केंद्रीय विश्वविद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक सहभागी संस्थान के अंतर्गत लगभग 35 कॉलेजों और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को इस पहल से जोड़ा जाएगा।
इससे शिक्षा संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच मजबूत संवाद स्थापित होगा। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य शैक्षणिक परिसरों को सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण के केंद्रों में बदलना है।
विकसित भारत @2047 के विजन से जुड़ी पहल
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047” विजन का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह पहल समावेशी विकास, महिला नेतृत्व आधारित प्रगति, आत्मनिर्भरता और डिजिटल सशक्तिकरण जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है।
उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, डिजिटल तकनीक और आर्थिक अवसरों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि “नारी सेतु भारत पहल” जैसे अभियान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी में वृद्धि होगी।
युवाओं की भागीदारी को बताया महत्वपूर्ण
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति यदि सामाजिक जागरूकता अभियानों से जुड़ती है तो देश में व्यापक परिवर्तन संभव है।
शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को समाज के साथ जोड़ने से शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। इससे विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
डिजिटल साक्षरता और आत्मनिर्भरता पर जोर
“नारी सेतु भारत पहल” के अंतर्गत महिलाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसके साथ ही महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सशक्तिकरण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सामाजिक जागरूकता का बनेगा बड़ा मंच
आयोजकों के अनुसार यह पहल केवल महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक जागरूकता को भी नई दिशा देना है। अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा और सरकारी योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शैक्षणिक संस्थान सामाजिक अभियानों से जुड़ते हैं तो समाज में स्थायी परिवर्तन संभव हो सकता है।
राष्ट्र निर्माण की दिशा में बड़ा कदम
“नारी सेतु भारत पहल” को महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। यह पहल शिक्षा, जागरूकता और डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को सामाजिक विकास से जोड़ने का कार्य करेगी।
आयोजकों का कहना है कि आने वाले समय में इस अभियान को देशभर में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा, ताकि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को मजबूत आधार मिल सके।
यह जरूर पढ़े :
