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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्पेशल सेंटर फॉर डिजास्टर रिसर्च (SCDR) में “Reimagining Higher Education in the Age of Artificial Intelligence and Digital Transformation: Pedagogy, Research, Governance, and Institutional Change” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन SAFL India Foundation और SCDR, JNU के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

सम्मेलन में देशभर के शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल परिवर्तन की भूमिका, चुनौतियों और संभावनाओं पर गंभीर चर्चा करना था।

दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई शुरुआत

सम्मेलन की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए SCDR, JNU के चेयरपर्सन प्रो. एस. श्रीकेश ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में तकनीक के जिम्मेदार और संतुलित उपयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि AI आधारित शिक्षा व्यवस्था को मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़ना जरूरी है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शिक्षा अध्ययन विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर ने बतौर मुख्य अतिथि डिजिटल शिक्षण, समावेशी शिक्षा और शैक्षणिक नेतृत्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा प्रणाली में डिजिटल तकनीक छात्रों के सीखने के अनुभव को बेहतर बना सकती है।

AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और Neev AI के संस्थापक अर्जुन सिंह बेदी ने शिक्षा व्यवस्था में AI की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था, शोध और नवाचार को नई दिशा दे सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी विकास को नैतिकता, पारदर्शिता और समावेशिता के साथ लागू करना आवश्यक है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. क्षितिज कुमार सिंह ने विशेष संबोधन में AI से जुड़े कानूनी और नैतिक पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने डेटा प्राइवेसी, डिजिटल गवर्नेंस और अकादमिक ईमानदारी जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया।

उच्च शिक्षा के भविष्य पर हुई विशेष चर्चा

सम्मेलन के दौरान “Artificial Intelligence and the Future of Higher Education: Governance, Innovation, and Inclusion” विषय पर एक प्लेनरी सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. दीप नारायण पांडेय ने की, जबकि सह-अध्यक्षता राष्ट्रीय सम्मेलन के समन्वयक डॉ. अभिजीत द्विवेदी ने की।

सत्र में Aurora Intelligence के संस्थापक कार्तिक शर्मा और महाराजा सूरजमल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी तोमर ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने AI आधारित शिक्षण, डिजिटल समावेशन, नीति सुधार और तकनीक आधारित शिक्षा प्रणाली में शिक्षकों की बदलती भूमिका पर चर्चा की।

इस दौरान डॉ. उज्ज्वल नारायण जी ने कहा कि AI उच्च शिक्षा में नवाचार, डिजिटल प्रशासन और समावेशी विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

तकनीकी सत्रों में शोध पत्र प्रस्तुत

सम्मेलन के अंतर्गत JNU परिसर में विभिन्न तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया। इन सत्रों में शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने AI आधारित शिक्षण पद्धति, संस्थागत परिवर्तन, डिजिटल नॉलेज सिस्टम, शिक्षा में नैतिकता, मानसिक स्वास्थ्य, समावेशिता और सतत विकास जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए।

सम्मेलन के संयोजक जगदीश बिश्नोई ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में तेजी से बढ़ते AI के प्रभाव को समझने के लिए अकादमिक और नीति स्तर पर गंभीर चर्चा जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को छात्रों को केवल तकनीकी रूप से सक्षम ही नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक रूप से भी जिम्मेदार बनाना होगा।

SAFL India Foundation के निदेशक और सम्मेलन के सह-संयोजक लव कुमार सिंह ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षा, तकनीक, शासन और समाज के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य की शिक्षा प्रणाली में नवाचार और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ समापन

सम्मेलन के समापन सत्र में पूर्व डीजीपी मेघालय और SDGP असम डॉ. एल.आर. बिश्नोई (IPS) तथा JNU के प्रोफेसर रवि शेखर विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन, प्रमाण पत्र वितरण और भविष्य में समावेशी एवं नैतिक शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के संकल्प के साथ हुआ।

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