भारत मंथन पर्वभारत मंथन पर्व

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला कॉलेज (SPM College) में राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा “भारत मंथन पर्व 2026” के अंतर्गत एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “नागरिक कर्तव्य” और “स्वदेशी आत्मनिर्भरता” रहा। कार्यक्रम का आयोजन इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र और अन्य प्रमुख संस्थानों के सहयोग से किया गया, जिसमें शिक्षाविदों, विद्वानों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

संगोष्ठी का उद्देश्य और शुरुआत

भारत मंथन पर्व 2026 का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर गहन विचार-विमर्श करना था। कार्यक्रम की शुरुआत विभिन्न कक्षों में आयोजित तकनीकी सत्रों से हुई, जहां कुल 42 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन सत्रों में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

इसके बाद आयोजित सामान्य सत्र का शुभारंभ पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्वलन, भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि और वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस अवसर ने पूरे वातावरण को देशभक्ति और चिंतनशील ऊर्जा से भर दिया।

विशिष्ट वक्ताओं के विचार

कार्यक्रम के दौरान डॉ. मनीष कुमार सिंह ने इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र की गतिविधियों और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। वहीं, श्री विनोद शर्मा “विवेक” ने भारत मंथन पर्व की संकल्पना को विस्तार से समझाया।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर नीलम गोयल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कार्यक्रम की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां छात्रों को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का अवसर प्रदान करती हैं।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख श्री नरेंद्र ठाकुर का मुख्य भाषण रहा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान और चेतना का प्रतीक है।

नागरिक कर्तव्य और आत्मनिर्भरता पर जोर

श्री नरेंद्र ठाकुर ने नागरिक कर्तव्य और आत्मनिर्भरता के बीच गहरे संबंध को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब नागरिक अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करते हैं, तभी एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।

उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए परंपरागत मूल्यों और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर बल दिया। उनका यह संदेश छात्रों और उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक रहा।

सांस्कृतिक प्रस्तुति और सहभागिता

कार्यक्रम के दौरान आकांक्षा थैपियाल द्वारा “नागरिक कर्तव्य एवं स्वदेशी आत्मनिर्भरता” विषय पर प्रस्तुत एकल गीत ने सभी उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया। इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक आयाम जोड़ते हुए विषय की गंभीरता को और प्रभावी बनाया।

इस संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिससे विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला। यह आयोजन एक मजबूत बौद्धिक मंच के रूप में सामने आया।

सहयोग और आयोजन

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र के साथ-साथ एन.सी.वेब, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया। इस सहयोग ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आमना मिर्ज़ा ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि सह-संयोजक डॉ. उर्मिल वत्स ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सहयोगी संस्थानों और प्रायोजकों, विशेष रूप से केनरा बैंक, के प्रति आभार व्यक्त किया।

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