दिल्ली विश्वविद्यालय के रामानुजन कॉलेज में “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इमर्जिंग ट्रेंड्स इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड कम्प्यूटेशनल साइंसेज़ (ICET-AICS 2026)” का भव्य शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कॉलेज के कंप्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला कॉलेज के सहयोग से किया गया।
ग़ालिब ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के शिक्षाविद, शोधकर्ता और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल साइंसेज़ के क्षेत्र में उभरते रुझानों पर चर्चा करना और शोध को नई दिशा देना है।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ उद्घाटन
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और कुलगीत के साथ हुई। इससे पूरे आयोजन में एक गरिमामय और अकादमिक वातावरण बना।
संयोजक डॉ. कमलेश रघुवंशी ने स्वागत भाषण देते हुए सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई और कम्प्यूटेशनल साइंसेज़ आज के समय में शोध और नवाचार के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुके हैं।
विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण विचार
इस अवसर पर रामानुजन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजिंदर कुमार पांडे ने एआई आधारित शोध के सामाजिक प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल नवाचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे समाज को सुरक्षित और प्रगतिशील बनाना भी जरूरी है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला कॉलेज की प्राचार्य प्रो. नीलम गोयल ने शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे संयुक्त आयोजन छात्रों और शोधार्थियों के लिए नए अवसर खोलते हैं।
मुख्य अतिथि प्रो. मुकेश मोहानिया (IIIT दिल्ली) ने अपने संबोधन में एआई के विकेंद्रीकरण की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों में एआई से जुड़े पाठ्यक्रमों का विस्तार होना चाहिए, ताकि अधिक छात्र इस तकनीक से जुड़ सकें।
इंडस्ट्री अनुभव भी हुआ साझा
मुख्य वक्ता डॉ. विवेक गुप्ता (संस्थापक एवं सीईओ, इंडसलैब एआई) ने अपने औद्योगिक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था ने कई एआई आधारित एजेंट्स विकसित किए हैं, जो दैनिक जीवन और कार्यस्थल को अधिक कुशल बना रहे हैं।
उनका मानना है कि आने वाले समय में एआई तकनीक हर क्षेत्र में बदलाव लाएगी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
शोध पत्र प्रस्तुतिकरण में दिखा उत्साह
उद्घाटन सत्र के बाद सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुतिकरण सत्र आयोजित किए गए। ये सत्र हाइब्रिड मोड में हुए, जिससे अधिक प्रतिभागियों को जुड़ने का अवसर मिला।
सम्मेलन में कुल 81 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें 26 शोध पत्र ऑफलाइन और 55 ऑनलाइन प्रस्तुत किए गए। विभिन्न विषयगत सत्रों में एआई, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और कम्प्यूटेशनल तकनीकों पर गहन चर्चा हुई।
इन सत्रों में छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को उपयोगी सुझाव भी दिए।
अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान रहा खास आकर्षण
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन व्याख्यान रहा। इसमें वियतनाम की पीपल्स सिक्योरिटी अकैडमी की प्रो. डॉ. फाम थी थान्ह थ्यूई ने “टेक्स्ट-आधारित पर्सन सर्च” विषय पर प्रस्तुति दी।
उन्होंने बताया कि कंप्यूटर विज़न और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) के संयोजन से संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कैसे की जा सकती है। यह तकनीक सुरक्षा और निगरानी के क्षेत्र में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि सीमित डेटा, भाषाई विविधता और गैर-अंग्रेज़ी भाषाओं में एआई के उपयोग से जुड़ी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।
ज्ञान और नवाचार का मंच बना सम्मेलन
सम्मेलन का पहला दिन ज्ञानवर्धक और संवादपरक रहा। इसने प्रतिभागियों को एआई और कम्प्यूटेशनल साइंसेज़ के नए आयामों को समझने का अवसर दिया।
आयोजकों का कहना है कि यह सम्मेलन न केवल शोध को बढ़ावा देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत करेगा।
अंत में सह-संयोजक डॉ. मनीष कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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