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दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु महाविद्यालय में सोमवार को ‘भारत मंथन 2026’ राष्ट्रीय संगोष्ठी का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित इस बहु-दिवसीय अकादमिक आयोजन में विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद, शोधार्थी और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए।

यह संगोष्ठी 6 अप्रैल से 11 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसका विषय “मानव कल्याण के परिप्रेक्ष्य में पंच परिवर्तन का क्रियान्वयन: चुनौतियाँ एवं समाधान” रखा गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर व्यापक विमर्श को बढ़ावा देना है।

उद्घाटन सत्र में कुटुम्ब प्रबोधन पर केंद्रित चर्चा

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का विषय ‘कुटुम्ब प्रबोधन’ रहा। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति से केंद्र गीत और भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुई। इसके बाद विभिन्न वक्ताओं ने भारतीय परिवार व्यवस्था और उसके सामाजिक महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर पूर्व में आयोजित संगोष्ठी (मई 2025) के चयनित शोध पत्रों के संकलन का लोकार्पण भी किया गया, जिसे उपस्थित विद्वानों ने सराहा।

“परिवार भारत का ब्रांड है” — मुख्य वक्ता

मुख्य वक्ता चार्टर्ड अकाउंटेंट श्री अनिल गुप्ता (दिल्ली प्रांत कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने अपने संबोधन में कहा कि “परिवार भारत का ब्रांड है।” उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में परिवार केवल सामाजिक इकाई नहीं, बल्कि मूल्य, संस्कार और परंपराओं का आधार है।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक समय में पश्चिमी प्रभाव के कारण पारिवारिक संरचना कमजोर हो रही है, जिसे पुनः सशक्त बनाने की आवश्यकता है।

शिक्षाविदों ने रखे विचार

देशबंधु महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राजेन्द्र पाण्डेय ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि पंच परिवर्तन की अवधारणा राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे अकादमिक आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होंगे।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के रेक्टर प्रो. ब्रजेश पाण्डेय ने भी परिवार की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज की स्थिरता और संतुलन के लिए परिवार की सुदृढ़ संरचना आवश्यक है।

आगामी सत्र विभिन्न कॉलेजों में आयोजित

आयोजकों के अनुसार, संगोष्ठी के तहत अलग-अलग विषयों पर दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में सत्र आयोजित किए जाएंगे।
7 अप्रैल को मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय में ‘पर्यावरण संरक्षण’, 8 अप्रैल को किरोड़ीमल महाविद्यालय में ‘सामाजिक समरसता’ तथा 10 अप्रैल को श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय में ‘नागरिक कर्तव्य’ और ‘स्व का भाव’ विषय पर चर्चा होगी।

संगोष्ठी का समापन 11 अप्रैल को रामजस महाविद्यालय में होगा, जहां विभिन्न विषयों पर प्रस्तुत शोध पत्रों और निष्कर्षों पर विचार किया जाएगा।

शोध पत्रों की प्रस्तुति और भागीदारी

उद्घाटन दिवस पर लगभग 150 प्रतिभागियों की उपस्थिति दर्ज की गई। ‘कुटुम्ब प्रबोधन’ विषय पर कुल 60 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 30 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें 11 शोध पत्र विद्यार्थियों और 19 प्राध्यापकों द्वारा प्रस्तुत किए गए।

शोध पत्रों के माध्यम से परिवार, समाज और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा की गई।

समापन

उद्घाटन सत्र का समापन ‘कल्याण मंत्र’ के साथ हुआ। आयोजकों का कहना है कि ‘भारत मंथन 2026’ का उद्देश्य अकादमिक विमर्श के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए ठोस दिशा प्रदान करना है।

यह संगोष्ठी भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण के विषयों पर संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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