रूस-यूक्रेन युद्धरूस-यूक्रेन युद्ध

रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की कोशिशों के बीच भारत की कूटनीतिक पहल चर्चा में है। भारत ने रूस और यूक्रेन के बीच तत्काल तनाव कम करने के लिए काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, अनाज निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर बातचीत का प्रस्ताव रखा है। यूक्रेन ने इस प्रस्ताव को अब तक मिले प्रस्तावों में बेहतर बताया है। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति पहल की सराहना की है।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा है कि नई दिल्ली ने हाल के महीनों में रूस और यूक्रेन के साथ बातचीत तेज की है। हालांकि, अभी इसे दोनों देशों के बीच अंतिम शांति समझौता नहीं माना जा सकता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का प्रस्ताव क्या है?

भारत ने अपने प्रस्ताव की सभी शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं। हालांकि, इसके प्रमुख बिंदुओं में काला सागर में सुरक्षित नौवहन, अनाज निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना शामिल है।

भारत की कोशिश तत्काल उन मुद्दों पर सहमति बनाने की है, जिनका असर रूस और यूक्रेन के साथ-साथ दूसरे देशों पर भी पड़ रहा है। इसके तहत ऊर्जा और बंदरगाहों से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने जैसे मुद्दे भी बातचीत में शामिल बताए गए हैं।

काला सागर में जहाजों की सुरक्षा पर जोर

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान काला सागर में जहाजों और बंदरगाहों की सुरक्षा अहम मुद्दा रही है। यहां सैन्य गतिविधियों का असर व्यापार और अनाज की आपूर्ति पर पड़ा है।

भारत के प्रस्ताव में सुरक्षित नौवहन की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके अलावा अनाज के निर्यात को जारी रखने की कोशिश भी शामिल है। इससे वैश्विक खाद्य आपूर्ति और व्यापार को राहत मिलने की संभावना बन सकती है।

यूक्रेन ने भारत के प्रस्ताव को बताया बेहतर

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के मुताबिक, कीव को युद्धविराम के लिए भारत, अमेरिका, तुर्की और मिस्र से अलग-अलग प्रस्ताव मिले हैं। उन्होंने भारत के प्रस्ताव को व्यापक बताया है।

यूक्रेन की ओर से ऊर्जा और काला सागर में युद्धविराम से जुड़े प्रस्तावों पर विचार करने की बात कही गई है। हालांकि, कीव चाहता है कि किसी भी युद्धविराम व्यवस्था में ऊर्जा क्षेत्र और बंदरगाहों पर हमले रोकने के प्रावधान भी शामिल हों।

इस स्थिति में भारत की पहल को फिलहाल युद्धविराम की दिशा में एक कूटनीतिक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। इसे रूस और यूक्रेन के बीच अंतिम शांति समझौता कहना अभी जल्दबाजी होगी।

भारत की पहल अमेरिका से कैसे अलग है?

अमेरिका भी रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए लंबे समय से प्रयास करता रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए हैं।

हालांकि, भारत की स्थिति अमेरिका से अलग है। भारत के रूस के साथ पुराने रणनीतिक संबंध हैं। दूसरी ओर, यूक्रेन के साथ भी भारत के राजनयिक संबंध बने हुए हैं।

युद्ध शुरू होने के बाद भी नई दिल्ली ने मॉस्को के साथ संवाद जारी रखा। साथ ही यूक्रेन के साथ भी संपर्क बनाए रखा। इसी वजह से भारत दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए एक अलग कूटनीतिक स्थान बनाने की कोशिश कर रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर पुतिन ने मोदी की तारीफ की

भारत की पहल के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति कोशिशों की सराहना की है। पुतिन के अनुसार, मोदी लगातार संघर्ष खत्म करने का मुद्दा उठाते रहे हैं और उनके पास संभावित समाधान को लेकर अच्छे विचार हैं।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा है कि भारत रूस और यूक्रेन के संपर्क में है। नई दिल्ली का प्रयास केवल युद्ध रोकने की अपील तक सीमित नहीं है। भारत व्यावहारिक मुद्दों पर दोनों पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है।

भारत के लिए क्यों अहम है रूस-यूक्रेन युद्ध?

रूस-यूक्रेन युद्ध का भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों पर भी असर पड़ता है। रूस भारत का महत्वपूर्ण ऊर्जा और रक्षा साझेदार है। दूसरी ओर, यूरोप और पश्चिमी देशों के साथ भारत के व्यापारिक और रणनीतिक संबंध भी लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

ऐसे में युद्ध का लंबा खिंचना भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन की चुनौती बढ़ाता है। यदि भारत की पहल से सीमित युद्धविराम और आगे बातचीत का रास्ता बनता है, तो इससे नई दिल्ली की कूटनीतिक भूमिका को मजबूती मिल सकती है।

फिलहाल रूस और यूक्रेन के बीच व्यापक शांति समझौते की राह खुलना कई अन्य मुद्दों पर सहमति पर निर्भर करेगा। भारत की पहल में अभी काला सागर, ऊर्जा आपूर्ति, अनाज निर्यात और हमले रोकने जैसे तत्काल मुद्दों पर सहमति बनाने पर जोर दिखाई दे रहा है।

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