Israel Government Formation: इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट को नई गठबंधन सरकार बनाने का पहला मौका दिया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की विपक्ष की कोशिश तेज हो गई है।
राष्ट्रपति के फैसले के बाद आइसेनकोट के पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय है। जरूरत पड़ने पर उन्हें 14 दिन का अतिरिक्त समय भी मिल सकता है। हालांकि, संसद में बहुमत जुटाना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
इजराइल में 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा में जारी संघर्ष ने राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित किया है। चुनाव में नेतन्याहू और उनके सहयोगी बहुमत हासिल करने में सफल नहीं रहे। वहीं, आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
इस स्थिति में अरब पार्टियां सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
इजराइल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत
इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सीटें हैं। किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए।
चुनाव के बाद आइसेनकोट के नेतृत्व वाले नेतन्याहू-विरोधी गुट के पास 48 सीटें हैं। इनमें उनकी अपनी याशर पार्टी की 21 सीटें शामिल हैं।
गठबंधन की अन्य पार्टियों में टुगेदर के पास 12, द डेमोक्रेट्स के पास 8 और यिसरायल बेतेनु के पास 7 सीटें हैं।
अरब पार्टियां बन सकती हैं किंगमेकर
सरकार गठन में अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जॉइंट लिस्ट और राअम के पास कुल 19 सीटें बताई गई हैं।
यदि ये दोनों पार्टियां आइसेनकोट के गठबंधन को समर्थन देती हैं, तो उसके पास कुल 67 सीटें हो सकती हैं। यह सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों से अधिक है।
हालांकि, दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हैं। इसलिए केवल नेतन्याहू का विरोध उन्हें एक साथ लाने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो सकता।
नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के समर्थन का किया विरोध
राष्ट्रपति की घोषणा से पहले ही बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्षी गठबंधन और अरब पार्टियों के बीच संभावित समझौते का विरोध शुरू कर दिया था।
AP की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने आइसेनकोट और अरब पार्टियों के बीच गठबंधन रोकने के लिए अभियान चलाया है। उन्होंने बिना सार्वजनिक सबूत पेश किए अरब पार्टियों पर चुनाव चुराने का आरोप भी लगाया।
नेतन्याहू ने वीडियो संदेश जारी कर राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की अपील की। उन्होंने ऐसी सरकार के गठन पर भी सवाल उठाए, जिसमें उनके मुताबिक आतंकवाद का समर्थन करने वाली पार्टियां शामिल हों।
अरब पार्टियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया
नेतन्याहू और उनके सहयोगी लंबे समय से अरब पार्टियों की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि इन पार्टियों का समर्थन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
इसके विपरीत, आइसेनकोट ने कुछ शर्तों के साथ अरब पार्टियों का समर्थन लेने की संभावना जताई है। उनकी प्रमुख शर्त है कि ये पार्टियां हमास को आतंकवादी संगठन मानें और उसके खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करें।
आइसेनकोट के सामने गठबंधन की बड़ी चुनौती
आइसेनकोट के लिए सरकार बनाना आसान नहीं होगा। उनके गठबंधन में शामिल प्रमुख दलों के बीच कई नीतिगत मुद्दों पर मतभेद हैं।
अरब पार्टियों के साथ औपचारिक गठबंधन को लेकर भी विपक्षी खेमे में एक राय नहीं है। कुछ नेता ऐसी सरकार के पक्ष में नहीं हैं, जिसे अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़े।
अल्पमत सरकार का भी विकल्प
आइसेनकोट एक अल्पमत सरकार बनाने के विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं। इस व्यवस्था में अरब पार्टियां सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन दे सकती हैं।
हालांकि, उनके गठबंधन के कुछ नेताओं ने इस विकल्प को स्वीकार करने से इनकार किया है। ऐसे में सरकार गठन के लिए सभी सहयोगी दलों के बीच सहमति बनाना जरूरी होगा।
धार्मिक पार्टियों को लेकर नेतन्याहू और विपक्ष में मतभेद
इजराइल की राजनीति में धार्मिक पार्टियों की भूमिका भी सरकार गठन का बड़ा मुद्दा है। नेतन्याहू लंबे समय से धार्मिक और राष्ट्रवादी दलों के समर्थन पर निर्भर रहे हैं।
इनमें कुछ अति-रूढ़िवादी पार्टियां मांग करती हैं कि अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के पुरुषों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट दी जाए।
यह मुद्दा इजराइल में लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है। दूसरी ओर, विपक्षी दल सैन्य सेवा में समान जिम्मेदारी की मांग करते रहे हैं।
इसके अलावा, 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले से पहले और उसके दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई विफलताओं की औपचारिक जांच भी विवाद का मुद्दा है। नेतन्याहू पर इस मामले में जांच का विरोध करने के आरोप लगते रहे हैं।
आइसेनकोट की पार्टी ने नेतन्याहू के बयान की आलोचना की
आइसेनकोट की पार्टी याशर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर नेतन्याहू के वीडियो संदेश की आलोचना की।
पार्टी ने लिकुड के नेताओं से अपील की कि वे कट्टरपंथी पार्टियों के साथ अपना गठबंधन समाप्त करें। साथ ही स्पष्ट किया कि आइसेनकोट उन्हीं दलों और सांसदों के साथ काम करेंगे, जो उनके राजनीतिक सिद्धांतों का समर्थन करेंगे।
इस बयान से स्पष्ट है कि विपक्ष केवल सरकार बनाने के लिए संख्या जुटाने पर ही नहीं, बल्कि गठबंधन की शर्तों पर भी जोर दे रहा है।
क्या नेतन्याहू की सत्ता खत्म कर पाएंगे आइसेनकोट?
इजराइल में सरकार गठन की प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। आइसेनकोट के पास 28 दिन में बहुमत जुटाने का अवसर है। जरूरत पड़ने पर उन्हें दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मिल सकता है।
अरब पार्टियों का समर्थन मिलने पर उनका गठबंधन बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकता है। हालांकि, वैचारिक मतभेद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे इस कोशिश में बाधा बन सकते हैं।
दूसरी ओर, नेतन्याहू राष्ट्रीय एकता सरकार की संभावना तलाश रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इजराइल की राजनीति में गठबंधन और सत्ता के समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।
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