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ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। ब्रिटेन के कुछ सांसदों और इजराइल की खुफिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए टॉक्सिक केमिकल सब्सटेंस का इस्तेमाल किया। आरोपों के अनुसार, यह ऐसा “डिलेयड केमिकल अटैक” था, जिसका असर तुरंत नहीं दिखा, लेकिन कुछ दिनों बाद पीड़ितों की हालत बिगड़ती चली गई और कई मामलों में मल्टी ऑर्गन फेल्योर से मौत हुई।

घरों और सड़कों पर मौतें, फांसीघर नहीं

रिपोर्टों में कहा गया है कि कथित तौर पर अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार ने लगभग 800 विद्रोहियों की फांसी माफ की, लेकिन इसके समानांतर हजारों प्रदर्शनकारियों की मौतें घरों और अस्पतालों में हुईं। आरोप है कि आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन में जहरीले केमिकल मिलाए गए, जिनसे संपर्क में आए लोगों को पहले गले में खराश, बुखार और सांस लेने में दिक्कत हुई, फिर कुछ ही दिनों में शरीर के अंग काम करना बंद करने लगे।

ब्रिटेन–इजराइल की रिपोर्टों का दावा

ब्रिटेन के सांसद बिल रैमल ने दावा किया है कि उनके पास खुफिया रिपोर्ट है, जिसके अनुसार 8–9 जनवरी को हुए प्रदर्शनों के दौरान ईरानी सुरक्षा बलों ने रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि गिरफ्तारियों की संख्या इतनी अधिक है कि जेलें भर चुकी हैं, परिवार अदालतों के बाहर भटक रहे हैं और कई मामलों में कानूनी सहायता तक नहीं दी जा रही।

इजराइली खुफिया आकलन के मुताबिक, कथित कार्रवाई में IRGC कुद्स फोर्स और उससे जुड़े प्रॉक्सी समूहों की भूमिका भी रही। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

किन केमिकल्स के इस्तेमाल का आरोप?

रिपोर्टों में जिन रसायनों का नाम लिया जा रहा है, वे बेहद खतरनाक बताए जाते हैं—

  • सल्फर मस्टर्ड (मस्टर्ड गैस): श्वसन तंत्र और बोन मैरो को नुकसान, 1–2 हफ्तों में गंभीर संक्रमण से मौत का जोखिम।

  • फॉस्जीन: रंगहीन गैस, शुरुआत में असर कम दिखता है, लेकिन 3–5 दिनों में फेफड़ों को गंभीर नुकसान।

  • लुइसाइट: आर्सेनिक युक्त रसायन, आंखों और फेफड़ों पर असर, कुछ दिनों में मल्टी ऑर्गन फेल्योर।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे केमिकल्स का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन होगा, लेकिन फिलहाल यह सब आरोप और खुफिया दावों के स्तर पर है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

ईरान में 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी कथित तौर पर कुछ गैसों के इस्तेमाल के आरोप लगे थे, हालांकि तब मौतों की पुष्टि नहीं हुई थी। इस बार आरोप कहीं अधिक गंभीर हैं क्योंकि देरी से मौत होने के पैटर्न की बात कही जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ट्रंप फैक्टर

इन घटनाक्रमों को कुछ विश्लेषक डोनाल्ड ट्रंप के लिए “रणनीतिक चुनौती” के रूप में देख रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि यदि केमिकल हथियारों के इस्तेमाल के पुख्ता सबूत सामने आते हैं, तो क्या अमेरिका और पश्चिमी देश इसे अनदेखा करेंगे या ईरान पर नई कार्रवाई की जाएगी।

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