स्थायी सीटस्थायी सीट

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग एक बार फिर चर्चा में है। रूस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत और ब्राजील को सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व दिए जाने का समर्थन किया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत बताई।

रूस ने जर्मनी और जापान को नई स्थायी सीट दिए जाने का विरोध भी किया है। हालांकि, रूस का समर्थन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे भारत को स्थायी सदस्यता सीधे नहीं मिल जाती। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सहमति और चार्टर में बदलाव की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कितने सदस्य हैं?

UNSC में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका पांच स्थायी सदस्य हैं। इन देशों के पास वीटो पावर है। इसके अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं।

स्थायी सदस्यता का क्या मतलब है?

स्थायी सदस्यता का मतलब सुरक्षा परिषद में लगातार प्रतिनिधित्व से है। वर्तमान स्थायी सदस्यों को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय प्रक्रिया में विशेष भूमिका प्राप्त है।

वीटो पावर के कारण स्थायी सदस्यों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी प्रस्ताव पर स्थायी सदस्य के विरोध की स्थिति में वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता, यदि वह वीटो के दायरे में आता है।

रूस के समर्थन से भारत की दावेदारी को क्या मिला?

भारत लंबे समय से UNSC में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि वर्तमान सुरक्षा परिषद की संरचना 1945 की परिस्थितियों पर आधारित है, जबकि आज वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और जनसंख्या का स्वरूप काफी बदल चुका है।

रूस ने भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। साथ ही उसने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भागीदारी बढ़ाने की बात कही है।

हालांकि, रूस का समर्थन केवल एक देश का समर्थन है। भारत को स्थायी सीट देने के लिए संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सदस्य देशों के बीच सहमति जरूरी होगी।

भारत को स्थायी सीट मिलने में सबसे बड़ा पेंच क्या है?

संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन

भारत की स्थायी सदस्यता के रास्ते में सबसे बड़ी कानूनी बाधाओं में से एक संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की प्रक्रिया है।

चार्टर के अनुच्छेद 108 के तहत संशोधन के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और सदस्य देशों की पुष्टि आवश्यक होती है। इसमें सुरक्षा परिषद के सभी मौजूदा स्थायी सदस्यों की पुष्टि भी जरूरी होती है।

यानी भारत की दावेदारी के समर्थन में पर्याप्त देश होने के बावजूद प्रक्रिया में किसी स्थायी सदस्य की असहमति महत्वपूर्ण बाधा बन सकती है।

नई स्थायी सीटों पर सहमति

दूसरा बड़ा सवाल यह है कि स्थायी सदस्यता किन देशों को मिले। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान जैसे देश लंबे समय से UNSC में स्थायी प्रतिनिधित्व की मांग करते रहे हैं।

वहीं अफ्रीकी देशों की ओर से भी सुरक्षा परिषद में स्थायी और प्रभावी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग की जाती रही है। इसलिए केवल परिषद का विस्तार करना पर्याप्त नहीं होगा। सदस्य देशों को नई सीटों के क्षेत्रीय और भौगोलिक बंटवारे पर भी सहमति बनानी होगी।

वीटो पावर का सवाल

यदि नए स्थायी सदस्य बनाए जाते हैं, तो उनके वीटो अधिकार को लेकर भी बड़ा सवाल सामने आएगा।

क्या नए स्थायी सदस्यों को मौजूदा पांच देशों के समान वीटो अधिकार मिलेगा या उन्हें अलग व्यवस्था के तहत रखा जाएगा? इस सवाल पर सहमति बनाना UNSC सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

भारत की दावेदारी के पक्ष में क्या तर्क हैं?

भारत दुनिया की बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल है और संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भी सैनिकों का योगदान करता रहा है।

भारत का पक्ष है कि वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में दुनिया के बड़े क्षेत्रों और विकासशील देशों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

भारत की दावेदारी को रूस सहित कई देशों का समर्थन अलग-अलग मौकों पर मिलता रहा है। हालांकि, समर्थन को स्थायी सदस्यता में बदलने के लिए औपचारिक सुधार प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

स्थायी सीट मिलने पर भारत को क्या फायदा होगा?

स्थायी सदस्यता मिलने पर भारत को सुरक्षा परिषद में लगातार प्रतिनिधित्व मिलेगा। इससे युद्ध, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, प्रतिबंध, शांति अभियानों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत की भागीदारी स्थायी हो सकती है।

यदि नए स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार भी देने पर सहमति बनती है, तो भारत को वीटो का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, यह सुधार के अंतिम समझौते पर निर्भर करेगा।

भारत विकासशील देशों, ग्लोबल साउथ, आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय शांति से जुड़े मुद्दों को परिषद की चर्चा में अधिक प्रभावी ढंग से उठा सकता है।

आगे की प्रक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?

रूस का समर्थन भारत की स्थायी सदस्यता की मांग के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम है। लेकिन UNSC में सुधार की प्रक्रिया केवल किसी एक देश के समर्थन से पूरी नहीं हो सकती।

नई स्थायी सीटों की संख्या, किन देशों को सीट मिलेगी, वीटो का अधिकार मिलेगा या नहीं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन जैसे सवालों पर व्यापक सहमति बनानी होगी।

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