राम मंदिर में दान चोरी मामले और उसके बाद हुए प्रशासनिक बदलावों के बीच अब राम मंदिर CEO की नियुक्ति प्रक्रिया तेज हो गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहली बार मंदिर के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने जा रहा है। ट्रस्ट की ओर से CEO पद के लिए पात्रता, चयन प्रक्रिया और जिम्मेदारियों को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इस बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि नया CEO ट्रस्ट के अधीन कार्य करेगा और उसके कामकाज में केंद्र या राज्य सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
राम मंदिर CEO की नियुक्ति क्यों चर्चा में है?
दान चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर प्रशासन में कई अहम बदलाव हुए हैं। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई, आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और गिरफ्तारियां भी हुईं। इसके बाद ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए। साथ ही कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इन्हीं घटनाक्रमों के बीच ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राम मंदिर CEO की क्या होंगी जिम्मेदारियां?
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार, नया CEO मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी करेगा। मंदिर के दैनिक संचालन, कर्मचारियों के समन्वय और वित्तीय प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी उसके पास होंगी।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि CEO स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधीन कार्य करेगा। ट्रस्ट ही उसकी शक्तियां और अधिकार तय करेगा।
राम मंदिर CEO पर सरकार का कितना होगा नियंत्रण?
नृपेंद्र मिश्रा ने साफ कहा कि राम मंदिर CEO के कार्यों में केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होगा। उन्होंने बताया कि CEO ट्रस्ट के सहायक अधिकारी के रूप में कार्य करेगा और सभी महत्वपूर्ण निर्णय ट्रस्ट के दायरे में ही लिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ट्रस्ट की निगरानी में रहेगी और सरकार केवल आवश्यक औपचारिक सहयोग तक सीमित रहेगी।
तीन सदस्यीय समिति करेगी राम मंदिर CEO का चयन
ट्रस्ट ने CEO चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में शामिल हैं—
- न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली
- लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी
- एनआईटी रायपुर के पूर्व चेयरपर्सन सुरेश हवारे
समिति योग्य उम्मीदवारों के आवेदन की समीक्षा कर ट्रस्ट को नामों की सिफारिश करेगी। अंतिम निर्णय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा लिया जाएगा।
क्या नृपेंद्र मिश्रा चयन समिति का हिस्सा हैं?
नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वह राम मंदिर CEO का चयन करने वाली समिति का हिस्सा नहीं हैं और न ही उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि यदि ट्रस्ट की आगामी बैठक का एजेंडा निर्माण कार्य से जुड़ा होगा, तभी वह उसमें भाग लेंगे। अन्य प्रशासनिक निर्णय ट्रस्ट अपने स्तर पर करेगा।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर क्या बोले नृपेंद्र मिश्रा?
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि राम मंदिर आने वाले अधिकांश श्रद्धालुओं से उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। उनके अनुसार, मंदिर की व्यवस्था, दर्शन प्रणाली और पूजा-पद्धति को लेकर भक्तों की ओर से कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य केवल प्रशासनिक सुधार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है।
राम मंदिर प्रशासन में नए दौर की शुरुआत
प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार राम मंदिर प्रशासन में इतने बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ट्रस्ट अब प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पेशेवर और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
ऐसे में राम मंदिर CEO की नियुक्ति को भविष्य की व्यवस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पहली बार राम मंदिर को एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिलेगा, जो ट्रस्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार मंदिर के संचालन और प्रशासनिक कार्यों का समन्वय करेगा।
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