बागी गुटबागी गुट

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के बागी नेताओं ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए दावा किया है कि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया है। इसके साथ ही पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भी पारित किए जाने की बात कही गई है।

कोलकाता में आयोजित एक विशेष बैठक के बाद बागी गुट ने नई कार्यकारिणी के गठन और नए नेतृत्व की घोषणा की। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कोलकाता में हुई विशेष बैठक

जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं की बैठक कोलकाता के न्यूटाउन इलाके स्थित एक होटल में आयोजित की गई। इस बैठक का नेतृत्व रीताब्रत बनर्जी ने किया।

बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी का दावा किया गया। बागी गुट ने कहा कि संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और नेतृत्व में बदलाव की मांग को लेकर यह बैठक बुलाई गई थी।

बैठक के बाद नेताओं ने संगठन में व्यापक बदलावों की घोषणा की।

अरूप रॉय को बनाया गया ऑल इंडिया चेयरमैन

बागी गुट ने दावा किया कि बैठक में नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन को मंजूरी दी गई। इसके तहत पूर्व मंत्री और विधायक अरूप रॉय को पार्टी का ऑल इंडिया चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

इसके अलावा 20 सदस्यीय वर्किंग कमेटी के गठन का भी ऐलान किया गया। बागी नेताओं का कहना है कि नई समिति संगठन के भविष्य की रणनीति और संरचना तय करेगी।

सूत्रों के अनुसार, नई कार्यकारिणी में कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है।

ममता बनर्जी को हटाने का दावा

बैठक के बाद बागी गुट ने दावा किया कि संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का निर्णय लिया गया है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस फैसले को पार्टी के आधिकारिक संविधान और संगठनात्मक प्रक्रियाओं के तहत कितना वैध माना जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के दावे पर अंतिम स्थिति पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व और चुनाव आयोग जैसे संबंधित संस्थानों की प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्रस्ताव

बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भी पारित किए जाने का दावा किया गया है।

बागी गुट के नेताओं के अनुसार, बैठक में मौजूद सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अभिषेक बनर्जी को निलंबित करने संबंधी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए गए।

हालांकि, इस संबंध में भी पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

TMC नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार

तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक इस बैठक या उसमें लिए गए निर्णयों की पुष्टि नहीं की गई है।

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही इस मुद्दे पर अपना पक्ष रख सकता है। फिलहाल बागी गुट के दावों और आधिकारिक स्थिति के बीच स्पष्टता का इंतजार किया जा रहा है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक शक्ति है और राज्य में लगातार सत्ता में बनी हुई है। ऐसे में पार्टी के भीतर सामने आया यह विवाद राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संगठन के भीतर मतभेद और बढ़ते हैं, तो इसका असर आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

हालांकि, फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी का आधिकारिक नेतृत्व इन दावों को किस प्रकार देखता है और आगे क्या कदम उठाता है।

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