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NCWEB, DU और राष्ट्रीय महिला आयोग के संयुक्त तत्त्वावधान में “व्यावसायिक क्षेत्र की निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ 2नवम्बर 2023, शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के सम्मेलन केंद्र में हुआ। अपरिहार्य कारणों से राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा शर्मा का कार्यक्रम में सान्निध्य प्राप्त नहीं हो सका। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुश्री डेलिना खोंगडुप का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

इस कार्यक्रम में अध्यक्ष के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. योगेश सिंह, मुख्य अतिथि के तौर पर सुश्री डेलिना खोंगडुप (सदस्य, राष्ट्रीय महिला आयोग), विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रो. सुषमा यादव (Pro – कुलपति, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय), प्रो. बलराम पाणि (डीन ऑफ कॉलेज़ेज, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं एन.सी.डब्ल्यू.ई.बी. के चेयरपर्सन), प्रो. गीता भट्ट (निदेशक, एन.सी.डब्ल्यू.ई.बी.) एवं डॉ. सुरेन्द्र कुमार (उप-निदेशक, एन.सी.डब्ल्यू.ई.बी.) सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रो. गीता भट्ट (निदेशक, एन.सी.डब्ल्यू.ई.बी.) ने स्वागत वक्तव्य में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए छात्राओं के सर्वांगीण विकास में NCWEB की बहुमुखी भूमिका का उल्लेख किया। इस कार्यक्रम के आयोजन में ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ की भागीदारी के लिए उनके प्रति NCWEB परिवार की ओर से प्रसन्नता व्यक्त करने के साथ कृतज्ञता भी अर्पित की। दिल्ली विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. योगेश सिंह के प्रति भी अपना आभार प्रकट किया। व्यावसायिक क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को लक्षित करते हुए कहा ‘…अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीन, अभी तो सारा आसमान बाक़ी है।’ साथ ही उन्होंने नेतृत्त्वकारी स्त्री-महत्त्वकाँक्षाओं के भविष्योन्मुखी दृष्टि को लक्षित किया। यह उम्मीद जताई कि यह सेमिनार इस विषय को सामाजिक भागीदारी की तरफ़ ले जाएगा।

दिल्ली विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में ‘…वो घर भी कोई घर है, जहाँ बेटियाँ न हों!’संबोधन के साथ अंतरिक्ष अनुसंधान संगठनों सहित देश के बड़े कॉरपोरेट संस्थानों(टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल, रिलायंस), शैक्षणिक संस्थानों आदि में स्त्री की केंद्रीय भूमिका को लक्षित किया।

विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रो. सुषमा यादव (Pro – कुलपति, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय) ने निर्णय प्रक्रिया में स्त्री की भूमिका ही नहीं बल्कि सहभागिता और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सकारात्मक हस्तक्षेप की बात कही। साथ ही स्त्री-नेतृत्त्व के सकारात्मक परिणामों की बात भी की।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में प्रो. बलराम पाणि (डीन ऑफ कॉलेज़ेज, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं एन.सी.डब्ल्यू.ई.बी. के चेयरपर्सन) ने शिक्षा के माध्यम से स्त्रियों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर ज़ोर दिया। साथ ही साथ किसी भी संस्थान के निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं का होना उसके उत्तरोत्तर विकास में सहायक होता है।

इसके बाद प्लेनरी सेशन-1 आरंभ हुआ जिसका विषय था ‘महिला नेतृत्त्व विकास की दिशा में संस्थागत तंत्र का सशक्तिकरण’। इस सत्र में सुश्री नैना सहस्रबुद्धे (उपाध्यक्ष, भारतीय स्त्री शक्ति), डॉ. शमिका रवि (सदस्य, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद) और प्रो. अजय कुमार सिंह (डीन एवं विभागाध्यक्ष, वाणिज्य विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। डॉ. शमिका रवि ने “केयर इकॉनमी और केयर इंफ्रास्ट्रक्चर” पर काम करने की बात की।

तदुपरान्त प्लेनरी सेशन-2 आरंभ हुआ जिसका विषय था ‘महिला नेतृत्व वाले व्यवसाय तथा उनके समक्ष प्रस्तुत सामाजिक और वैचारिक बाधाएँ: विचारधारा एवं वास्तविकता’। इस सत्र में सुश्री पूनम शर्मा (उपाध्यक्ष-एफ़एलओ निदेशक, आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड), सुश्री रश्मि मोहंती (मुख्य वित्त अधिकारी, एसबीआई सीसी), प्रो. सूर्या रश्मि रावत (एचपीकेवी बिज़नस स्कूल, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय) और प्रो. कविता शर्मा (वाणिज्य विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन का समापन हुआ।

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