अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट शासन वाला क्यूबा अब अपने आखिरी पलों में है और वहां जल्द बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है।
ट्रंप ने यह टिप्पणी शनिवार को फ्लोरिडा में आयोजित लैटिन अमेरिका समिट के दौरान की। इस बैठक में लैटिन अमेरिका के करीब एक दर्जन नेताओं ने हिस्सा लिया। हालांकि इस समिट में क्यूबा सरकार के किसी अधिकारी को आमंत्रित नहीं किया गया था।
अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि क्यूबा की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और वहां की सरकार लंबे समय से असफल साबित हुई है।
“क्यूबा के पास पैसा और तेल नहीं”
समिट में बोलते हुए ट्रंप ने क्यूबा की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा,
“क्यूबा के पास पैसा नहीं है, उनके पास तेल नहीं है। उनकी सोच खराब है और उनके पास एक ऐसा शासन है जो लंबे समय से असफल रहा है।”
ट्रंप ने आगे कहा कि क्यूबा अब “अपनी जिंदगी के आखिरी पलों में है” और आने वाले समय में वहां बड़े बदलाव संभव हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वे क्यूबा के हालात पर नजर रखे हुए हैं और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करेंगे।
व्हाइट हाउस में भी दिया संकेत
इससे पहले गुरुवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी ट्रंप ने क्यूबा को लेकर संकेत दिए थे।
उन्होंने कहा था कि अमेरिका में रह रहे क्यूबा के लोगों का अपने देश लौटना सिर्फ समय की बात है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान इस ओर इशारा करता है कि ईरान के साथ चल रहे तनाव के बाद क्यूबा ट्रंप प्रशासन का अगला बड़ा फोकस बन सकता है।
अमेरिकी दबाव से बढ़ा आर्थिक संकट
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध और दबाव बनाए रखे हैं।
अमेरिकी सरकार की इस नीति को अक्सर “प्रेशर कैंपेन” कहा जाता है। इसके तहत क्यूबा पर कई तरह के आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लगाए गए हैं।
रिपब्लिकन सांसदों और ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन प्रतिबंधों की वजह से क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार कमजोर हो रही है और जल्द ही वहां राजनीतिक बदलाव हो सकता है।
बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट
हाल ही में क्यूबा में ऊर्जा संकट और बिजली की भारी कमी भी देखने को मिली है।
पश्चिमी क्यूबा के कई हिस्सों में बुधवार को बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट हुआ था। इस घटना ने देश में बढ़ते ऊर्जा संकट को उजागर कर दिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका द्वारा लगाए गए फ्यूल ब्लॉकेड की वजह से क्यूबा के लिए तेल आयात करना मुश्किल हो गया है। इससे देश में ईंधन की भारी कमी हो गई है।
मार्च तक खत्म हो सकता है फ्यूल रिजर्व
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार क्यूबा की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अमेरिकी अखबार “द हिल” की रिपोर्ट में एनालिस्ट के हवाले से कहा गया है कि क्यूबा का बचा हुआ फ्यूल रिजर्व मार्च के मध्य या अंत तक खत्म हो सकता है।
अगर ऐसा होता है तो देश की इकॉनमी लगभग रुक सकती है। बिजली उत्पादन, परिवहन और उद्योगों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा।
मार्को रुबियो को दी जिम्मेदारी
क्यूबा से जुड़े मामलों में ट्रंप प्रशासन ने मार्को रुबियो को भी अहम जिम्मेदारी सौंपी है।
रुबियो को क्यूबा के अधिकारियों के साथ बातचीत करने और संभावित राजनीतिक समाधान तलाशने का काम दिया गया है।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा पर “फ्रेंडली तरीके से प्रभाव या नियंत्रण” बनाने के विकल्पों पर भी विचार किया है।
क्यूबा सरकार भी तलाश रही विकल्प
रिपोर्ट्स के अनुसार क्यूबा के नेता भी मौजूदा संकट से निकलने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
इनमें शामिल हैं:
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आर्थिक सुधार लागू करना
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क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना
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अमेरिका विरोधी देशों के साथ रिश्ते कम करना
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्यूबा आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम उठाता है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है।
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