दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) और महाविद्यालय चुनावों की सरगर्मियां अब अपने चरम पर हैं। पश्चिमी विभाग में चुनाव समिति का गठन होते ही माहौल में जोश और ऊर्जा का संचार हो गया है। विभाग संयोजक शुभम शर्मा ने एक विशेष बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विजय का बिगुल फूँक दिया।
बैठक में शुभम शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस बार का चुनाव सिर्फ सीटें जीतने का मुद्दा नहीं है, बल्कि छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य की सुरक्षा का आंदोलन है। उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज़ और सम्मान की है। इस बार ABVP के कार्यकर्ता तन-मन से मैदान में डटे हैं। हम तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक पश्चिमी विभाग के 6 कॉलेजों की सभी सीटें और DUSU की 4 सीटें हमारे खाते में नहीं आतीं।”
उन्होंने आगे कहा कि छात्र राजनीति केवल राजनीतिक वर्चस्व का साधन नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं के समाधान का माध्यम है। “बेहतर सुविधाएं, पारदर्शी छात्रावास आवंटन, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लाइब्रेरी में आवश्यक किताबों की उपलब्धता और हर छात्र के सम्मान की रक्षा – यही हमारे संघर्ष की प्राथमिकताएं हैं,” शुभम ने जोश के साथ कहा।
बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव में पूरी ताकत से उतरने का संकल्प लिया। सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी विभाग की टीम ने कॉलेज-स्तर पर संपर्क अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली है। आने वाले दिनों में विभाग के प्रमुख कार्यकर्ता कॉलेज परिसरों, हॉस्टल और कैफेटेरिया में छात्रों से सीधे संवाद करेंगे।
ABVP के स्थानीय नेताओं का मानना है कि इस बार पश्चिमी विभाग में संगठन की पकड़ पहले से कहीं मजबूत है। पिछले वर्ष के चुनावों में अच्छे प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊँचा है और संगठन ने जमीनी स्तर पर लगातार छात्रों से जुड़ाव बनाए रखा है।
छात्र राजनीति के जानकारों के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय में पश्चिमी विभाग का प्रदर्शन DUSU के समग्र नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इस बार विभाग संयोजक शुभम शर्मा का जोशीला संदेश न केवल कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा रहा है, बल्कि चुनावी माहौल को और भी रोचक बना रहा है।
अब देखना होगा कि पश्चिमी विभाग का यह विजय संकल्प किस हद तक वास्तविक जीत में बदलता है और क्या वास्तव में हर सीट पर ‘विजय पताका’ लहराई जा सकेगी।
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