नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड (NCWEB), दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय संविधान की बेटियाँ: विकसित भारत @ 2047 की ओर सशक्तीकरण के 75 वर्ष” का भव्य शुभारंभ आज नॉर्थ कैंपस स्थित शंकर लाल ऑडिटोरियम में हुआ। संगोष्ठी का आयोजन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) के सहभाग और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के प्रायोजन से किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार), विशिष्ट अतिथि प्रो. नारायणलाल गुप्ता (अध्यक्ष, ए.बी.आर.एस.एम.) व डॉ. विकास गुप्ता (कुलसचिव, दिल्ली विश्वविद्यालय), अध्यक्ष प्रो. बलराम पाणि (अधिष्ठाता महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय) और प्रो. गीता भट्ट (निदेशक, एन.सी.डबल्यू.ई.बी., दिल्ली विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय सचिव, ए.बी.आर.एस.एम.) उपस्थित रहीं।
इसके अतिरिक्त श्री महेंद्र कपूर (संगठन मंत्री, ए.बी.आर.एस.एम.), श्री गुंथा लक्ष्मण (सह-संगठन मंत्री, ए.बी.आर.एस.एम.), प्रो. राकेश कुमार पाण्डेय (प्रोफ़ेसर, भौतिक विज्ञान विभाग, के.एम.सी.), IAS आयुषी दबास व अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
माननीय अतिथियों द्वारा कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी के ऐब्स्ट्रैक्ट आधारित सोवेनियर का विमोचन किया गया। महिला सशक्तीकरण, संवैधानिक मूल्यों और विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना पर गहन विचार-विमर्श हुआ। स्वागत सम्बोधन में प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि संभवतः भारतीय संविधान दुनिया का एक ऐसा अनूठा संविधान है जिसकी संविधान सभा में 15 विदुषी महानायिकाएँ न केवल महिला प्रतिनिधि थीं बल्कि नागरिक प्रतिनिधि के तौर पर समावेशी संविधान की निर्मित में सक्रिय भागीदार रहीं।
मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री, भारत सरकार माननीय श्रीमती सावित्री ठाकुर उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि देश के विकास में महिलाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है इसलिए भारत की बेटियाँ विकसित भारत @ 2047 की आधारशिला हैं। चूँकि महिलाओं की प्रगति से ही देश की प्रगति सुनिश्चित होती है इसलिए भारतीय संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार प्रदान कर उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में स्थापित किया है। इसके साथ ही उन्होंने भारत की महिला सशक्तीकरण केन्द्रित योजनाओं और नीतियों के माध्यम से भारत सरकार की प्रतिबद्धता जताई।
विशिष्ट अतिथि प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि संविधान सभा की 15 विस्मृत दूरदर्शी महानायिकाएँ आधुनिक भारत की नींव थीं, जिन्होंने समता व भारतीयता(हम भारत के लोग) आधारित लोकतांत्रिक संविधान निर्मित किया। साथ उनकी दूरदर्शिता का आधुनिक भारत को लाभ उठाने के लिए इनके पुनर्पाठ की आवश्यकता पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. विकास गुप्ता ने कहा 2047 तक विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए कौशल विकास पर केंद्रित शिक्षा का होना जरूरी है। बेटियों को सशक्त करने में NCWEB इस दिशा में सक्रिय है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रो. बलराम पानी ने कहा कि ‘विकसित_भारत @ 2047’ के लक्ष्य को पाने हेतु शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के साथ “सिर्फ़ हायर नहीं, वेल क्वालिफ़ाइड” होना जरूरी है। ऐसे में स्त्री को इसका आधार बनाकर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।
संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर महिलाओं की भूमिका को पुनः स्थापित करना, उनकी दूरदर्शी दृष्टिकोण, योगदान को सामने लाना तथा वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों पर विमर्श करना है। यह मंच अकादमिक जगत, शोधार्थियों और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाकर संवाद की नई संभावनाएं भी प्रदान कर रहा है।
संगोष्ठी के पहले दिन प्लेनरी सत्र-1 में “राजनीति और शासन में महिलाएँ”, व प्लेनरी सत्र-2 में “प्रतिनिधित्त्व से नेतृत्त्व तक: शैक्षणिक प्रशासन और राष्ट्र निर्माण में महिलाएँ” जैसे विषयों पर स्त्रियों की निर्णायक भूमिका को लेकर विशेष चर्चा हुई।
संगोष्ठी की सफलता का अनुमान शैक्षणिक जगत की सक्रिय भागीदारी से लगाया जा सकता है, लगभग 600 पंजीकरण हुए और 300 से अधिक लोगों ने शोध-पत्र वाचन के लिए अपनी भागीदारी दिखाई। इसी कारण एक दिन पूर्व ऑनलाइन प्रस्तुति करनी पड़ी; जहाँ 4 सत्रों में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति दी। संगोष्ठी का समापन 20 मार्च को होगा जहाँ सुश्री मैथिली ठाकुर (लोकसभा सदस्य, भारत सरकार) एवं श्री सदानंद मास्टर (राज्यसभा सदस्य, भारत सरकार) सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रहेगी।
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