केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश करेंगी। मंगलवार को हलवा सेरेमनी के साथ ही बजट प्रक्रिया के अंतिम चरण की औपचारिक शुरुआत हो गई है। इसके बाद बजट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक में लॉक-इन हो गए हैं। वे कड़ी सुरक्षा में हैं और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए हैं।
इस हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक बार फिर चर्चा में है ‘ब्लू शीट’, जिसे बजट की सबसे गोपनीय और अहम कड़ी माना जाता है।
क्या है ब्लू शीट और क्यों है इतनी खास?
ब्लू शीट को बजट की रीढ़ (Backbone) कहा जाता है। इसमें बजट से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े और प्रस्ताव दर्ज होते हैं। इसे बजट का शुरुआती खाका माना जाता है।
यह दस्तावेज इतना गोपनीय होता है कि वित्त मंत्री भी इसे उत्तर ब्लॉक से बाहर नहीं ले जा सकतीं। ब्लू शीट संयुक्त सचिव (बजट) की निगरानी में रहती है और इसे बेहद सीमित अधिकारियों तक ही पहुंच दी जाती है।
बजट लीक की पुरानी घटना और सख्ती
आज भले ही बजट की सुरक्षा अभूतपूर्व हो, लेकिन इतिहास में एक बार बजट लीक भी हो चुका है।
साल 1950 में केंद्रीय बजट से जुड़े गोपनीय दस्तावेज राष्ट्रपति भवन की प्रेस से लीक हो गए थे। बजट पेश होने से पहले ही पूरे देश में उसकी चर्चा होने लगी।
इसके बाद सरकार ने बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए।
लॉक-इन सिस्टम क्यों जरूरी?
बजट दस्तावेजों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने लॉक-इन सिस्टम लागू किया।
इसके तहत बजट की प्रिंटिंग और अंतिम तैयारी के दौरान सभी अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक परिसर में ही रहते हैं।
बजट दस्तावेजों की छपाई को राष्ट्रपति भवन से हटाकर मिंटो रोड स्थित भारत सरकार की प्रेस में शिफ्ट किया गया। इसका उद्देश्य सुरक्षा को और मजबूत करना था।
बजट कैसे तैयार होता है? आसान भाषा में समझें
केंद्रीय बजट सरकार की आय और व्यय का पूरा खाका होता है। इसे तैयार करने की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के बजट डिवीजन पर होती है।
बजट की प्रक्रिया सितंबर से शुरू होकर करीब 5 महीने तक चलती है।
पहला चरण:
इसमें केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संस्थानों से अनुमानित खर्च का ब्यौरा लिया जाता है।
दूसरा चरण:
सरकार अर्थशास्त्रियों, व्यापारियों, किसानों और सिविल सोसायटी से चर्चा करती है ताकि जरूरतों को समझा जा सके।
तीसरा चरण:
आमदनी और खर्च का आकलन किया जाता है। टैक्स छूट और आर्थिक सहायता जैसे मुद्दों पर विचार होता है।
चौथा चरण:
बजट को अंतिम रूप दिया जाता है और वित्त मंत्री का भाषण तैयार होता है। विवादित बिंदुओं पर विशेषज्ञों की राय ली जाती है।
पांचवां चरण:
बजट पेश करने से पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक होती है। मंजूरी के बाद वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करती हैं।
इस साल निर्मला सीतारमण अपना 9वां बजट पेश करेंगी।
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