भारत में ग्रीन केमिस्ट्री को सतत औद्योगिक विकास का आधार बनाने की दिशा में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने नई दिल्ली स्थित पीएचडी हाउस में “भारत में ग्रीन केमिस्ट्री: चुनौतियाँ और सतत औद्योगिक परिवर्तन को गति प्रदान करना” विषय पर राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों ने भाग लेकर ग्रीन केमिस्ट्री को उद्योगों में प्रभावी ढंग से लागू करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। इस आयोजन में हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय ने नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभाई।
ग्रीन केमिस्ट्री को औद्योगिक विकास की आवश्यकता बताया गया
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का संचालन पीएचडीसीसीआई के निदेशक डॉ. नासिर जमाल ने किया। उन्होंने कहा कि ग्रीन केमिस्ट्री अब केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह औद्योगिक विकास, संसाधनों के कुशल उपयोग और दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन के मौजूदा दौर में उद्योगों को टिकाऊ उत्पादन प्रणाली अपनाने की आवश्यकता है।
उद्योग, सरकार और शिक्षण संस्थानों के समन्वय पर दिया गया जोर
मुख्य अतिथि अभय कुमार श्रीवास्तव, सीनियर प्रेसिडेंट (ऑपरेशन्स), मैनकाइंड फार्मा ने कहा कि सतत विनिर्माण प्रक्रियाओं को अपनाने से उत्पादन लागत कम होगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और वैश्विक बाजार में भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि ग्रीन केमिस्ट्री को सफल बनाने के लिए उद्योग, सरकार और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।
ग्रीन केमिस्ट्री के लिए नवाचार और नीतिगत सहयोग जरूरी
CSIR ने तकनीकी सहयोग पर दिया जोर
सीएसआईआर की वैज्ञानिक एवं हेड-बीडीजी डॉ. शैलजा डोनेमपुडी ने कहा कि ग्रीन केमिस्ट्री के व्यापक विस्तार के लिए उद्योग-अकादमिक सहयोग, नई तकनीकों का व्यावसायीकरण, वित्तीय सहायता और प्रभावी नीतिगत समर्थन अनिवार्य हैं।
उन्होंने कहा कि हरित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर टिकाऊ रासायनिक विनिर्माण का मजबूत केंद्र बन सकता है।
DSIR ने सरकारी योजनाओं की जानकारी दी
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) की वैज्ञानिक डॉ. सुमन मजूमदार ने पेस (PACE), PRISM तथा CRTDH जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ये योजनाएँ अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साथ ही उन्होंने CSIR-NCL और IIT पटना द्वारा विकसित कंटीन्युअस फ्लो मैन्युफैक्चरिंग, तेल रिसाव नियंत्रण तथा PET प्लास्टिक रीसाइक्लिंग जैसी तकनीकों का भी उल्लेख किया।
ग्रीन केमिस्ट्री में भारत के पास वैश्विक नेतृत्व का अवसर
दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एवं ग्रीन केमिस्ट्री नेटवर्क सेंटर के निदेशक प्रो. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि भारत नवाचार, अंतर्विषयक अनुसंधान और जिम्मेदार औद्योगिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ग्रीन केमिस्ट्री के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है।
उन्होंने बताया कि हिन्दू कॉलेज का ग्रीन केमिस्ट्री नेटवर्क सेंटर उच्च शिक्षा में सस्टेनेबिलिटी आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत नए शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
तकनीकी सत्रों में उद्योग और नीति पर हुई विस्तृत चर्चा
सम्मेलन में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
पहले सत्र में फार्मास्युटिकल एवं रासायनिक उद्योगों में फ्लो केमिस्ट्री, बायोकैटलिसिस, सुरक्षित विलायकों, नवीकरणीय कच्चे पदार्थों और सतत विनिर्माण तकनीकों पर चर्चा हुई।
दूसरे सत्र में ग्रीन केमिस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत ढाँचे, ESG मानकों, नियामकीय सुधार, वित्तीय सहायता तथा उद्योग और शिक्षाजगत के सहयोग पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
प्रोफेसर जॉन सी. वार्नर ने रखा वैश्विक दृष्टिकोण
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण ग्रीन केमिस्ट्री के सह-संस्थापक एवं Beyond Benign (अमेरिका) के प्रेसिडेंट प्रोफेसर जॉन सी. वार्नर का मुख्य व्याख्यान रहा।
उन्होंने कहा कि ग्रीन केमिस्ट्री का उद्देश्य ऐसी रासायनिक प्रक्रियाओं और उत्पादों का विकास करना है जिनमें हानिकारक पदार्थों का उपयोग शुरुआत से ही न्यूनतम या समाप्त कर दिया जाए। उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और बहु-क्षेत्रीय सहयोग को भविष्य की टिकाऊ औद्योगिक व्यवस्था की आधारशिला बताया।
विशेषज्ञों ने सतत विकास के लिए साझा किया विजन
सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि ग्रीन केमिस्ट्री जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने, प्रदूषण कम करने, संसाधनों के कुशल उपयोग और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्योग व्यापक स्तर पर हरित रासायनिक प्रक्रियाओं को अपनाते हैं तो भारत पर्यावरण संरक्षण और सतत औद्योगिक विकास दोनों क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
कार्यक्रम का समापन सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। सम्मेलन में व्यक्त सुझावों को भविष्य की नीतियों, हरित नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
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