दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस स्थित एस.पी. जैन ऑडिटोरियम में मोतीलाल नेहरू ईवनिंग कॉलेज द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में वस्तु एवं सेवा कर (GST) और भारत की कर प्रणाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. साकेत कुशवाहा उपस्थित रहे। उनके साथ कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संदीप गर्ग, संयोजक डॉ. रेनू कुमारी वर्मा, प्रो. आर. पी. तुल्सियन तथा IRS अधिकारी श्री शशांक द्विवेदी और श्री आदित्य यादव मंच पर मौजूद रहे।
पारंपरिक विधि से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
संगोष्ठी की शुरुआत सरस्वती वंदना और कुलगीत के साथ हुई। इसके बाद दीप प्रज्वलन और अतिथियों का सम्मान किया गया। इस पारंपरिक शुरुआत ने कार्यक्रम को एक गरिमामय दिशा दी।
संयोजक डॉ. रेनू कुमारी वर्मा ने अपने संबोधन में GST को एक ऐतिहासिक कर सुधार बताया। उन्होंने कहा कि GST ने भारत की कर प्रणाली को एकीकृत और पारदर्शी बनाया है।
विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण विचार
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संदीप गर्ग ने अपने वक्तव्य में भागीदारी आधारित शासन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी कर प्रणाली की सफलता नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है।
IRS अधिकारी श्री आदित्य यादव ने GST के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनुपालन और तकनीकी कमियां अभी भी प्रमुख समस्याएं हैं। हालांकि, डिजिटल सिस्टम के बढ़ते उपयोग से इन चुनौतियों को धीरे-धीरे कम किया जा रहा है।
प्रशासनिक और नीतिगत चुनौतियां
IRS अधिकारी श्री शशांक द्विवेदी ने जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को साझा किया। उन्होंने कहा कि कर प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नीतियों में लचीलापन जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि समय के साथ कर व्यवस्था को अपडेट करना आवश्यक है, ताकि बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार सुधार किया जा सके।
सरल कर प्रणाली और विश्वास पर जोर
प्रो. आर. पी. तुल्सियन ने अपने संबोधन में कहा कि कर प्रणाली को सरल बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि करदाताओं और सरकार के बीच विश्वास मजबूत होना चाहिए।
उनके अनुसार, यदि यह विश्वास बढ़ता है, तो कर अनुपालन भी बेहतर होगा और राजस्व में वृद्धि होगी।
मुख्य अतिथि का संबोधन
मुख्य अतिथि प्रो. साकेत कुशवाहा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कर प्रणाली केवल राजस्व संग्रह का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सुशासन और पारदर्शिता का आधार भी है।
उन्होंने नागरिकों से जिम्मेदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि कर भुगतान एक जागरूक नागरिक का कर्तव्य है।
तकनीकी सत्रों में गहन चर्चा
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में GST को एक विकसित होती डिजिटल प्रणाली के रूप में समझा गया।
इन सत्रों में वित्तीय संघवाद, अनुपालन व्यवहार, क्षेत्रीय असमानताओं और प्रशासनिक चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
संवाद का प्रभावी मंच
यह संगोष्ठी शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और पेशेवरों के बीच संवाद का एक प्रभावी मंच साबित हुई। यहां विभिन्न दृष्टिकोणों को साझा किया गया और सुधार के सुझाव सामने आए।
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