डीयू के शंकरलाल ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय संविधान की बेटियाँ: विकसित भारत @ 2047 की ओर सशक्तीकरण के 75 वर्ष” का शुक्रवार को सफल समापन हुआ। इस संगोष्ठी में महिला सशक्तीकरण, संवैधानिक मूल्यों और विकसित भारत की परिकल्पना पर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम में संविधान सभा की 15 महान महिला सदस्यों के योगदान पर विशेष ध्यान दिया गया। उनके नेतृत्व, दूरदर्शिता और समावेशी संविधान निर्माण में उनकी भूमिका को विस्तार से समझाया गया।
यह संगोष्ठी नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड (NCWEB) द्वारा आयोजित की गई थी। इसमें अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) का सहयोग और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) का प्रायोजन रहा।
समतामूलक भारत पर जोर
मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद श्री सी. सदानंदन मास्टर ने अपने संबोधन में राष्ट्र निर्माण और महिला सशक्तीकरण के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला ही मजबूत परिवार, बेहतर समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला बनती है।
उन्होंने कहा, “विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं है, बल्कि ऐसा समाज है जहाँ हर व्यक्ति को समान अवसर मिले। स्त्री और पुरुष दोनों अपने सपनों को पूरा कर सकें।”
उन्होंने केरल की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ राष्ट्रवादी विचारों से जुड़ी महिलाओं को वामपंथी तत्वों द्वारा निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, समाज में हिंसा का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है।
सी. सदानंदन मास्टर ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा,
“CPI(M) मेरे तन को मार सकता है, लेकिन राष्ट्र के लिए समर्पित मेरे मन को नहीं रोक सकता।”
बदलती भूमिका में महिलाओं की भागीदारी
प्रो. शशिकला वंजारी, कुलपति (NIEPA), ने कहा कि आधुनिक भारत में महिलाओं की बदलती भूमिका को समझने के लिए पारंपरिक सोच में बदलाव जरूरी है। उन्होंने रचनात्मक और संवेदनात्मक क्षमता के बेहतर उपयोग पर जोर दिया।
वहीं, साउथ कैंपस की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी ने कहा कि भारतीय संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों ने महिलाओं को सशक्त बनाया है। इन अधिकारों के कारण महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
संगोष्ठी के प्रमुख सत्र
संगोष्ठी के विभिन्न प्लेनरी सत्रों में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
प्लेनरी सत्र-3 का विषय था “संविधान निर्माण की नायिकाएँ और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान”। इस सत्र में प्रो. विनी कपूर मेहरा और प्रो. चंद्रकला पाडिया ने 15 विस्मृत महिला नेताओं के योगदान को सामने रखा। उन्होंने बताया कि इन महिलाओं ने लोकतांत्रिक भारत की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
प्लेनरी सत्र-4 “विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना और महिलाएँ” पर आधारित था। इस सत्र में विधायक मैथिली ठाकुर, अंजलि जोशी और प्रज्ज्वल बस्टा ने युवाओं और महिलाओं की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें ABRSM के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री महेंद्र कपूर, संयुक्त संगठन मंत्री श्री गुंथा लक्ष्मण, अध्यक्ष श्री नारायण लाल गुप्ता और प्रो. राकेश कुमार पांडेय शामिल थे।
शोध और निष्कर्ष
संगोष्ठी के दौरान कुल 224 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन शोधों में महिला अधिकार, शिक्षा, सामाजिक समानता और संविधान की भूमिका जैसे विषय शामिल रहे।
कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रो. गीता भट्ट ने प्रस्तुत की। अंत में पीजी केंद्र प्रभारी डॉ. प्रेमपाल सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।
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