दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय में ‘भारत मंथन पर्व’ के अंतर्गत मंगलवार को ‘पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा किया गया, जिसमें इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड (NCWEB), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने संयुक्त सहयोग दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी में शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
पर्यावरण और मानव जीवन के संबंध पर जोर
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. योगेश्वर शर्मा ने अपने स्वागत संबोधन में प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण के साथ हो रहा अत्यधिक दोहन आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पर्यावरण संरक्षण को लेकर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका प्रभाव सीधे मानव अस्तित्व पर पड़ेगा।
‘लालच’ को बताया पर्यावरण संकट का मूल कारण
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री विशाल जी (प्रांत प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली) ने अपने संबोधन में दिल्ली के प्रदूषण स्तर से लेकर वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों तक विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संकट के पीछे मानव समाज का बढ़ता ‘लालच’ प्रमुख कारण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनियंत्रित उपभोग की प्रवृत्ति प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रही है।
अथर्ववेद के उद्धरण “पुत्रोऽहं पृथिव्याः” का उल्लेख करते हुए उन्होंने पृथ्वी को माता के रूप में देखने और उसके संरक्षण को मानव का कर्तव्य बताया।
3R के साथ ‘Refuse’ पर दिया जोर
मुख्य वक्ता ने पर्यावरण संरक्षण के पारंपरिक सिद्धांत Reduce, Reuse और Recycle के साथ ‘Refuse’ (अनावश्यक वस्तुओं के त्याग) को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए केवल बाहरी प्रयास ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत व्यवहार और सोच में भी बदलाव जरूरी है।
इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र की भूमिका पर प्रकाश
विशिष्ट अतिथि श्री विनोद शर्मा ‘विवेक’ (प्रमुख, इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र) ने अपने संबोधन में संस्था की वैचारिक यात्रा और सामाजिक विषयों पर उसके कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र समाज के ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर अध्ययन कर समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।
तकनीकी सत्रों में शोध पत्र प्रस्तुत
संगोष्ठी के दौरान आयोजित तकनीकी और समानांतर सत्रों में विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने कुल 30 शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन शोध पत्रों में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम में कुल 74 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जिसमें शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
पौधरोपण के साथ दिया संदेश
संगोष्ठी के अंत में पर्यावरण संरक्षण के संदेश को व्यवहारिक रूप देते हुए महाविद्यालय परिसर में पौधरोपण किया गया। मुख्य अतिथियों ने पुस्तकालय के सामने स्थित उद्यान में पौधे लगाए और सभी को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
भारत मंथन पर्व का दूसरा दिन
उल्लेखनीय है कि 5 अप्रैल से 11 अप्रैल तक चल रहे ‘भारत मंथन पर्व’ के अंतर्गत यह दूसरा दिन था। इससे पहले देशबंधु कॉलेज में ‘कुटुंब प्रबोधन’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई थी।
आयोजकों के अनुसार, इस श्रृंखला का उद्देश्य पंच परिवर्तन के विभिन्न आयामों पर समाज और अकादमिक जगत के बीच संवाद स्थापित करना है।
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