ईरानईरान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की चेतावनी देकर वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन यदि यह फैसला लागू होता है तो इसका सीधा असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है।

इस चेतावनी का मकसद ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और रणनीतिक साझेदारियों को भी प्रभावित कर सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, भारत की चिंता बढ़ी

टैरिफ की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 64 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो नवंबर के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।

भारत अपनी 85% से अधिक तेल जरूरतें आयात के जरिए पूरी करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर:

  • पेट्रोल-डीजल के दाम

  • महंगाई दर

  • आम आदमी की जेब

  • देश की समग्र अर्थव्यवस्था

पर पड़ना तय माना जा रहा है।

क्या भारत को ईरान से व्यापार घटाना पड़ेगा?

भारत और ईरान के बीच कुल सालाना व्यापार 4 अरब डॉलर से कम है। भारत मुख्य रूप से ईरान को:

  • चावल

  • चाय

  • दवाएं

निर्यात करता है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को देखते हुए भारत इन सीमित निर्यातों के लिए 25% अमेरिकी टैरिफ का जोखिम नहीं लेगा। ऐसे में ईरान के साथ व्यापार में कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 चाबहार पोर्ट: भारत के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक सवाल

https://www.geopoliticalmonitor.com/wp-content/uploads/2018/05/ChabaharPort-Header.jpg
https://iranprimer.usip.org/sites/default/files/Map.png?s196279d1570565677=

भारत के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा चाबहार पोर्ट है। यह बंदरगाह ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित है और भारत के लिए:

  • अफगानिस्तान

  • मध्य एशिया

तक पहुंच का रणनीतिक मार्ग प्रदान करता है।

भारत इस पोर्ट को एक दीर्घकालिक समझौते के तहत संचालित कर रहा है। अमेरिका ने इसके लिए छह महीने की प्रतिबंध छूट दी थी, जो अप्रैल तक वैध है। लेकिन सवाल यह है कि नया टैरिफ लागू होने पर क्या यह छूट प्रभावी रहेगी या नहीं—इस पर अब भी असमंजस बना हुआ है।

भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया क्या है?

अब तक भारत सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • अमेरिका भारत का अहम रणनीतिक साझेदार है

  • मोदी सरकार संतुलित और कूटनीतिक रुख अपनाएगी

  • जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाएगी

चीन पर भी पड़ सकता है असर

यह टैरिफ चेतावनी चीन के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और तेल खरीदार है। हालांकि जानकारों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन चीन के साथ पहले से चल रहे व्यापारिक तनाव को और बढ़ाने से बच सकता है।

क्या यह टैरिफ फैसला लागू हो पाएगा?

इस पूरे मामले में एक बड़ा मोड़ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ला सकती है। कोर्ट जल्द यह तय कर सकती है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप को IEEPA कानून के तहत इस तरह के टैरिफ लगाने का अधिकार है या नहीं।

अगर सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक ठहरा दिया, तो यह पूरा टैरिफ विवाद यहीं खत्म भी हो सकता है

यह भी जरूर पढ़े :

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका की नज़र, 100 अरब डॉलर का दांव?

Discover more from The BG Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading