दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज में 6 अप्रैल से ‘भारत मंथन 2026’ नामक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन शुरू होने जा रहा है। छह दिवसीय यह शैक्षणिक कार्यक्रम 11 अप्रैल तक दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में आयोजित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष संगोष्ठी का विषय “मानव कल्याण के परिप्रेक्ष्य में पंच परिवर्तन का क्रियान्वयन: चुनौतियाँ व समाधान” रखा गया है। कार्यक्रम का आयोजन इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड (NCWEB), दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र देशबंधु कॉलेज में
संगोष्ठी का उद्घाटन 6 अप्रैल को देशबंधु कॉलेज परिसर में होगा। पहले दिन ‘कुटुंब प्रबोधन’ विषय पर अकादमिक सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी अपने शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे।
इस अवसर पर इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र के प्रमुख विनोद शर्मा ‘विवेक’, सह-प्रमुख प्रो. राकेश कुमार पांडेय, अजेय जी (पूर्व बौद्धिक प्रमुख, उत्तरी क्षेत्र, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ), प्रो. गीता भट्ट (निदेशक, NCWEB) और देशबंधु कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजेंद्र कुमार पांडेय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।
विभिन्न कॉलेजों में विषयवार सत्र
आयोजन के तहत अलग-अलग विषयों पर दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में सत्र आयोजित किए जाएंगे।
7 अप्रैल को मोतीलाल नेहरू कॉलेज में ‘पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर चर्चा होगी, जबकि 8 अप्रैल को किरोड़ीमल महाविद्यालय में ‘सामाजिक समरसता’ विषय केंद्र में रहेगा।
इसी क्रम में 10 अप्रैल को श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय में ‘स्व का बोध’ और ‘नागरिक कर्तव्य’ विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
पंच परिवर्तन पर केंद्रित मंथन
आयोजकों ने बताया कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य ‘पंच परिवर्तन’ के विचार को समाज और अकादमिक जगत में स्थापित करना है। इसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी विचार और नागरिक कर्तव्य जैसे विषय शामिल हैं।
इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र के अनुसार, यह पहल एक समरस और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में अकादमिक संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास है।
बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की भागीदारी
संगोष्ठी के लिए 150 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं, जबकि 500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल होंगे।
समापन रामजस कॉलेज में
कार्यक्रम का समापन 11 अप्रैल को रामजस कॉलेज में होगा। समापन दिवस पर बाहरी राज्यों से आए प्रतिभागी अपने शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद संवाद सत्र और समापन समारोह आयोजित किया जाएगा।
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