अली लारिजानीअली लारिजानी

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी की मौत के बाद देश में तनाव बढ़ गया है। एक हमले में उनकी मौत की पुष्टि के बाद ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है।

सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल को सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

मोज्तबा खामेनेई का बयान

मोज्तबा खामेनेई ने अपने बयान में कहा कि अली लारिजानी, उनके बेटे और कई सहयोगियों की मौत बेहद दुखद है। उन्होंने लारिजानी को एक अनुभवी और समर्पित नेता बताया।

उन्होंने कहा कि लारिजानी ने दशकों तक ईरान की सेवा की। वे राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ थे।

खामेनेई ने यह भी कहा कि इस तरह के हमले दुश्मनों की शत्रुता को दिखाते हैं। लेकिन इससे ईरान का संकल्प और मजबूत होगा।

लगातार निशाने पर ईरान का नेतृत्व

रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले एक महीने से जारी संघर्ष में अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बना रहे हैं।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी हाल ही में पुष्टि की कि उनके इंटेलिजेंस मंत्री इस्माइल खातिब मारे गए हैं।

इजरायल ने दावा किया था कि खातिब हवाई हमले में मारे गए। इसके बाद ईरानी नेतृत्व ने इसे कायराना हमला बताया।

लारिजानी का राजनीतिक महत्व

अली लारिजानी ईरान की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली नेता थे। उन्होंने साल 2005 में देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा पद को संभाला था।

वे ईरान के प्रमुख परमाणु वार्ताकार भी रहे हैं। पश्चिमी देशों के साथ बातचीत में उनकी अहम भूमिका थी।

उनकी मौत के बाद तेहरान में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर असर पड़ा है। इससे ईरान की रणनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है।

युद्ध के 19वें दिन भी तनाव बरकरार

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का यह 19वां दिन है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक कई ईरानी अधिकारी मारे जा चुके हैं।

इजरायल का दावा है कि उसने ईरान की सुरक्षा संरचना में बड़ी सेंध लगा दी है।

यह संघर्ष अब केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहा। यह एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव में बदल चुका है।

क्षेत्रीय और वैश्विक असर

इस युद्ध का असर अब पूरे क्षेत्र पर दिखने लगा है। लेबनान, खाड़ी देश और वैश्विक शिपिंग रूट भी प्रभावित हो रहे हैं।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर पड़ रहा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है।

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