नई दिल्ली स्थित Dr. B. R. Ambedkar International Centre में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “डिजिटल समाज और मानवीय मूल्य: एआई युग में एकात्म मानव दर्शन का पुनरुद्धार” का रविवार को औपचारिक समापन हुआ। इस सम्मेलन में देश-विदेश के 800 से अधिक शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया।
संगोष्ठी का आयोजन Akhil Bharatiya Rashtriya Shaikshik Mahasangh (एबीआरएसएम), शैक्षिक फाउंडेशन और Deen Dayal Upadhyaya College के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। दो दिनों में 250 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।मानव-केंद्रित हो डिजिटल क्रांति
समापन सत्र में मुख्य अतिथि केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री Arjun Ram Meghwal ने कहा कि एआई का कानूनी और नैतिक ढांचा मानव कल्याण पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने हालिया वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि 86 देशों द्वारा समावेशी तकनीक पर सहमति भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करना है। मंत्री ने ‘विरासत’ और ‘विकास’ को साथ लेकर चलने पर बल दिया।
तकनीक को भारतीय दर्शन की दिशा
देश के प्रमुख शिक्षाविदों ने भी अपने विचार रखे।
Babasaheb Bhimrao Ambedkar University के कुलपति प्रो. आर.के. मित्तल ने कहा कि तकनीक एक बहती नदी की तरह है, जिसे रोका नहीं जा सकता, पर उसकी दिशा तय की जा सकती है।
Jawaharlal Nehru University की कुलपति प्रो. शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा कि एआई युग में शिक्षक की भूमिका ‘फैसिलिटेटर’ की है, जो विद्यार्थियों को नैतिक विवेक प्रदान करते हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. नारायणलाल गुप्ता ने ‘एकात्म मानव दर्शन’ को एआई के समुचित उपयोग का मार्गदर्शक बताया।
राष्ट्रीय सुरक्षा और एआई
प्लेनरी सत्र-3 ‘राष्ट्रीय सुरक्षा—एआई-प्रेरित युग में आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा की चुनौतियाँ’ पर केंद्रित रहा। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर और अन्य विशेषज्ञों ने एआई के सुरक्षा आयामों पर विस्तार से चर्चा की।
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