दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित Hindu College ने अपना 127वाँ स्थापना दिवस उत्साह, गरिमा और बौद्धिक ऊर्जा के साथ मनाया। यह अवसर संस्थापक कृष्णदास जी गुरवाले के योगदान को स्मरण करने और राष्ट्र-निर्माण के प्रति कॉलेज की प्रतिबद्धता को दोहराने का महत्वपूर्ण मंच बना।
समारोह के मुख्य अतिथि रहे Dr. Ajay Kumar, अध्यक्ष, Union Public Service Commission (UPSC)। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष टी.सी.ए. रंगनाथन ने की, जबकि प्राचार्या प्रो. अंजू श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
स्वतंत्रता संग्राम से एआई युग तक
अपने संबोधन में डॉ. अजय कुमार ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदू कॉलेज की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कॉलेज ने केवल विचारों में नहीं, बल्कि कर्म और संघर्ष के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण में योगदान दिया।
उन्होंने छात्रों से एक महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किया—“क्या हम फिर से महान बन सकते हैं?”
डॉ. कुमार ने भारत के भविष्य को आकार देने वाली दो प्रमुख शक्तियों पर जोर दिया: भारत का संभावित उत्थान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का युग।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई भारत को स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है। साथ ही, तकनीक के साथ नैतिक मूल्यों का संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। उनके शब्दों में, “प्रश्न यह नहीं कि एआई भविष्य बदलेगा या नहीं, बल्कि यह कि हम उसे दिशा देंगे या वह हमें।”
वार्षिक उपलब्धियों की प्रस्तुति
प्राचार्या प्रो. अंजू श्रीवास्तव ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध परियोजनाओं, प्रकाशनों और अधोसंरचना विकास का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हिंदू कॉलेज ने National Institutional Ranking Framework (NIRF) में कला और विज्ञान संकाय में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
समारोह में कॉलेज और विश्वविद्यालय के टॉपर्स को सम्मानित किया गया। पुस्तकालय द्वारा आयोजित शोध प्रदर्शनी विशेष आकर्षण रही। बड़ी संख्या में एलुमनाई भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन छात्र समितियों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसने परिसर की सृजनात्मक ऊर्जा को जीवंत रूप दिया।
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