हिंदू कॉलेजहिंदू कॉलेज

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में शुक्रवार को “रचनात्मक मस्तिष्क के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI for the Creative Mind)” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में शिक्षा, शासन और शोध के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न विषयों के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। हिंदू कॉलेज हिंदू कॉलेज 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज की प्राचार्या प्रो. अंजू श्रीवास्तव ने भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शैक्षणिक एवं आर्थिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विदेशी तकनीकी समाधानों पर अत्यधिक निर्भरता को कम कर स्वदेशी एआई नवाचार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी विकसित होंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम धीरे-धीरे आधुनिक तकनीकी विकासों के अनुरूप ढाला जा रहा है, ताकि विद्यार्थी डिजिटल युग की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में IIIT दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. विनीश कथूरिया ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य मानव क्षमताओं को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उन्हें और अधिक सशक्त बनाना है।
डॉ. कथूरिया ने कानून, शासन, स्वास्थ्य सेवा और कर व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में एआई द्वारा लाए जा रहे सकारात्मक परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने समावेशी तकनीकी विकास के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में एआई टूल्स के विकास की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने एल्गोरिथ्मिक पक्षपात (Algorithmic Bias), भ्रामक सूचनाओं और डेटा नैतिकता जैसी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि भविष्य के लिए नैतिक, पारदर्शी और उत्तरदायी एआई विकास अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला का समापन रोजगार के भविष्य पर एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ, जिसमें रचनात्मकता, विश्लेषणात्मक क्षमता और विशेष कौशल-आधारित रोजगार संभावनाओं के विस्तार पर बल दिया गया। वक्ताओं ने माना कि एआई के युग में बहु-कौशल (Multi-Skill) और रचनात्मक सोच विद्यार्थियों की सबसे बड़ी ताकत होगी।

यह भी जरूर पढ़े :

युवा कवि व गीत सम्मेलन: श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में काव्य, शायरी और संगीत की यादगार शाम

Discover more from The BG Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading